हिंदू धर्म में चैत्र पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। यह दिन भगवान विष्णु और भगवान हनुमान की पूजा के लिए बेहद शुभ माना जाता है। साल 2026 में चैत्र पूर्णिमा 2 अप्रैल को पड़ रही है। इसी दिन देशभर में हनुमान जयंती भी मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह हिंदू नववर्ष की पहली पूर्णिमा होती है, इसलिए इस दिन किए गए स्नान, दान और पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है।
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार चैत्र पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु, भगवान हनुमान और चंद्रमा की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने और जरूरतमंदों को दान देने की परंपरा भी है। मान्यता है कि इस दिन किए गए पुण्य कार्यों का फल पूरे वर्ष मिलता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
पंचांग के अनुसार, साल 2026 में चैत्र पूर्णिमा तिथि 1 अप्रैल की रात से शुरू होकर 2 अप्रैल तक रहेगी। उदया तिथि के अनुसार 2 अप्रैल को ही चैत्र पूर्णिमा का व्रत और पूजा की जाएगी। इसी दिन हनुमान जयंती का पर्व भी बड़े श्रद्धा भाव से मनाया जाएगा। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, हनुमान चालीसा का पाठ और भंडारे का आयोजन किया जाता है।
इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना और सूर्य देव को अर्घ्य देना शुभ माना जाता है। इसके बाद भगवान विष्णु और भगवान हनुमान की विधि-विधान से पूजा की जाती है। हनुमान जी को सिंदूर, चमेली का तेल, लाल फूल और बूंदी या बेसन के लड्डू अर्पित किए जाते हैं। साथ ही हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ करना भी बेहद फलदायी माना जाता है।
चैत्र पूर्णिमा के दिन दान का भी विशेष महत्व होता है। इस दिन जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, जल, फल या धन का दान करना पुण्यदायी माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और कई तरह की परेशानियां दूर होती हैं।
धार्मिक दृष्टि से चैत्र पूर्णिमा आध्यात्मिक साधना और पुण्य कर्मों का विशेष दिन माना जाता है। इसलिए श्रद्धालु इस दिन व्रत, पूजा और दान के माध्यम से भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।
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