पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने दुनिया को अपने एक बेहद गुप्त सैन्य ठिकाने की झलक दिखाई है, जिसे उसने “मिसाइल-ड्रोन सिटी” बताया है। इस सैन्य अड्डे में बड़ी संख्या में आधुनिक मिसाइलों और आत्मघाती यानी कामिकेज़ ड्रोन का विशाल बेड़ा मौजूद बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन ड्रोन और मिसाइलों की मदद से ईरान रणनीतिक रूप से बेहद अहम समुद्री मार्ग होर्मुज जलडमरूमध्य पर दबाव बना सकता है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर बड़ा असर पड़ सकता है।
ईरानी मीडिया में जारी किए गए वीडियो और तस्वीरों में लंबी सुरंगों के अंदर बड़ी संख्या में ड्रोन और मिसाइलें खड़ी दिखाई देती हैं। इन सुरंगों को इस तरह बनाया गया है कि दुश्मन की निगरानी से बचा जा सके और हमले की स्थिति में हथियारों को तेजी से तैनात किया जा सके। ईरान ने दावा किया है कि उसके पास बड़ी संख्या में कामिकेज़ ड्रोन मौजूद हैं, जो लक्ष्य तक पहुंचकर खुद को विस्फोट के साथ नष्ट कर देते हैं। ऐसे ड्रोन कम लागत में भी बड़े सैन्य या आर्थिक लक्ष्यों को नुकसान पहुंचाने की क्षमता रखते हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, अगर ईरान इन ड्रोन का इस्तेमाल समुद्री रास्तों को निशाना बनाने में करता है तो दुनिया के लिए बड़ी चुनौती खड़ी हो सकती है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे व्यस्त तेल मार्गों में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। यदि यहां किसी तरह की रुकावट आती है तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल सकता है।
ईरान का यह कदम ऐसे समय सामने आया है जब क्षेत्र में पहले से ही तनाव बढ़ा हुआ है। पश्चिम एशिया में कई देशों के बीच चल रहे संघर्ष और सैन्य गतिविधियों ने हालात को संवेदनशील बना दिया है। ऐसे में ईरान द्वारा अपने मिसाइल और ड्रोन क्षमता का प्रदर्शन करना कई देशों के लिए चेतावनी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।
हालांकि अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का कहना है कि यह केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन भी हो सकता है, जिसका उद्देश्य अपने विरोधियों को संदेश देना है कि ईरान के पास मजबूत जवाबी क्षमता मौजूद है। फिलहाल दुनिया की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच आगे क्या रणनीतिक कदम उठाए जाते हैं और इसका वैश्विक ऊर्जा बाजार तथा सुरक्षा समीकरणों पर क्या प्रभाव पड़ता है।
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