दुनिया भर में न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के इलाज की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। जापान ने पहली बार एक नई स्टेम-सेल आधारित थेरेपी को मंजूरी दे दी है, जिसे खास तौर पर Parkinson’s Disease और गंभीर Heart Failure के मरीजों के इलाज के लिए विकसित किया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह चिकित्सा तकनीक आने वाले समय में लाखों मरीजों के लिए उम्मीद की नई किरण बन सकती है।
क्या है यह नई थेरेपी
यह उपचार Stem Cell Therapy पर आधारित है। इसमें विशेष प्रकार की स्टेम कोशिकाओं का उपयोग किया जाता है, जो शरीर में क्षतिग्रस्त या कमजोर हो चुकी कोशिकाओं की जगह नई और स्वस्थ कोशिकाएं विकसित करने में मदद करती हैं।
पार्किंसंस रोग में दिमाग की वे कोशिकाएं धीरे-धीरे नष्ट हो जाती हैं जो डोपामिन नामक रसायन बनाती हैं। इसी कारण मरीजों में कंपन, चलने-फिरने में कठिनाई और संतुलन की समस्या होने लगती है। नई थेरेपी का उद्देश्य इन क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की जगह नई कोशिकाएं विकसित कर लक्षणों को कम करना है।
मरीजों तक कब पहुंचेगा इलाज
रिपोर्ट्स के मुताबिक इस उपचार को मंजूरी मिलने के बाद कुछ ही महीनों में इसे सीमित स्तर पर मरीजों के लिए उपलब्ध कराया जा सकता है। शुरुआत में इसे विशेष चिकित्सा केंद्रों में नियंत्रित तरीके से लागू किया जाएगा ताकि इसके परिणामों की लगातार निगरानी की जा सके।
क्यों है यह उपलब्धि महत्वपूर्ण
दुनिया भर में लाखों लोग पार्किंसंस रोग से पीड़ित हैं और फिलहाल उपलब्ध इलाज मुख्य रूप से लक्षणों को नियंत्रित करने तक ही सीमित हैं। ऐसे में स्टेम-सेल आधारित यह नई तकनीक बीमारी की जड़ पर काम करने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह थेरेपी व्यापक स्तर पर सफल साबित होती है, तो न केवल पार्किंसंस बल्कि कई अन्य गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए भी नई संभावनाएं खुल सकती हैं।
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