कैबिनेट में शामिल किए गए नए मंत्रियों ने अपनी-अपनी प्राथमिकताएं तय कर ली हैं और विभागों के अनुसार कार्य योजना बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। उनका कहना है कि वे जनता से जुड़े मुद्दों को प्राथमिकता देते हुए योजनाओं को जमीन पर उतारने का काम तेजी से करेंगे। खासकर शिक्षा, स्वास्थ्य, ग्रामीण विकास और तकनीकी क्षेत्र में सुधार को लेकर सरकार गंभीर नजर आ रही है।
विभागीय फेरबदल की बात करें तो धन सिंह रावत से स्वास्थ्य विभाग वापस ले लिया गया है, जो अब किसी अन्य मंत्री को सौंपा गया है। वहीं सतपाल महाराज से पंचायतीराज और जलागम विभाग हटाए गए हैं। इसी तरह सुबोध उनियाल के पास से तकनीकी शिक्षा और भाषा विभाग वापस लिया गया है, जबकि गणेश जोशी से ग्राम्य विकास विभाग हटाया गया है।
दूसरी ओर, रेखा आर्या और सौरभ बहुगुणा के विभागों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। दोनों मंत्री पहले की तरह अपने-अपने विभागों की जिम्मेदारी संभालते रहेंगे।
नई जिम्मेदारियां मिलने के बाद मंत्रियों ने यह भरोसा दिलाया है कि वे राज्य सरकार की योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करेंगे। उनका उद्देश्य केवल योजनाओं की घोषणा करना नहीं, बल्कि उनके परिणाम को आम जनता तक पहुंचाना है। इसके लिए विभागीय समन्वय, निगरानी और पारदर्शिता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
कुल मिलाकर, इस कैबिनेट विस्तार को सरकार की नई रणनीति के रूप में देखा जा रहा है, जिसका मकसद प्रशासनिक दक्षता बढ़ाना और विकास कार्यों को नई गति देना है। आने वाले समय में इन बदलावों का असर राज्य की प्रगति और जनकल्याण योजनाओं पर साफ तौर पर दिखाई देने की उम्मीद है।
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