सूत्रों के अनुसार, पीएम मोदी ने दोनों नेताओं के साथ अलग-अलग वार्ताओं में मौजूदा हालात पर चिंता जताई और तनाव कम करने के लिए संवाद और कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में शांति न केवल संबंधित देशों के लिए, बल्कि वैश्विक स्थिरता और आर्थिक संतुलन के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।
यूएई के राष्ट्रपति के साथ बातचीत में भारत-यूएई रणनीतिक साझेदारी और खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा पर चर्चा हुई। भारत के लिए यूएई एक अहम साझेदार है, जहां बड़ी भारतीय आबादी रहती है और ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से भी यह क्षेत्र महत्वपूर्ण है। ऐसे में बढ़ते हमलों और अस्थिरता से भारत की आर्थिक और सामुदायिक चिंताएं भी जुड़ी हुई हैं।
इसके बाद इस्राइल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू से हुई बातचीत में पीएम मोदी ने क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति पर विस्तृत चर्चा की। भारत और इस्राइल के बीच रक्षा और तकनीकी सहयोग मजबूत रहा है, लेकिन भारत ने हमेशा शांति और संवाद की नीति पर जोर दिया है। बताया जा रहा है कि बातचीत के दौरान संयम बरतने और तनाव को व्यापक संघर्ष में बदलने से रोकने की जरूरत पर बल दिया गया।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत का यह रुख उसकी ‘संतुलित कूटनीति’ की नीति को दर्शाता है, जिसमें वह सभी पक्षों के साथ संवाद बनाए रखते हुए शांति की वकालत करता है। पश्चिम एशिया भारत के लिए ऊर्जा, व्यापार, प्रवासी भारतीयों और सामरिक सहयोग के लिहाज से बेहद अहम क्षेत्र है।
बढ़ते भू-राजनीतिक संकट के बीच पीएम मोदी की यह पहल इस संदेश को मजबूत करती है कि भारत क्षेत्रीय विवादों के समाधान में संवाद और स्थिरता को प्राथमिकता देता है। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे, यह तो समय बताएगा, लेकिन फिलहाल भारत ने शांति और संयम का स्पष्ट संदेश दिया है।
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