रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुछ हमलों में Amazon के क्लाउड नेटवर्क से जुड़े डेटा सेंटर भी प्रभावित हुए हैं। इन सेंटरों का संचालन मुख्य रूप से Amazon Web Services द्वारा किया जाता है, जो दुनिया भर में क्लाउड स्टोरेज और डिजिटल सेवाएं उपलब्ध कराता है। ऐसे डेटा सेंटर इंटरनेट सेवाओं, ऐप्स, बैंकिंग सिस्टम और सरकारी डिजिटल प्लेटफॉर्म के लिए बेहद अहम माने जाते हैं।
बताया जा रहा है कि Iran और Israel के कुछ क्षेत्रों में स्थित डेटा सेंटरों को भी संभावित हमलों का सामना करना पड़ा है। हालांकि इन घटनाओं की पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है, लेकिन सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर और फिजिकल दोनों तरह के हमलों का खतरा बढ़ गया है।
आधुनिक दौर में डेटा सेंटर किसी देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाते हैं। इनमें बड़े पैमाने पर सर्वर, नेटवर्किंग सिस्टम और क्लाउड स्टोरेज मौजूद होता है, जिन पर लाखों वेबसाइट, मोबाइल ऐप्स और ऑनलाइन सेवाएं निर्भर करती हैं। ऐसे में अगर ये सेंटर प्रभावित होते हैं तो उसका असर सिर्फ एक देश ही नहीं बल्कि कई देशों की डिजिटल सेवाओं पर भी पड़ सकता है।
विशेषज्ञों के मुताबिक युद्ध के बदलते स्वरूप में अब ऊर्जा संयंत्रों, संचार नेटवर्क और डेटा सेंटर जैसे डिजिटल ढांचे को भी रणनीतिक लक्ष्य के रूप में देखा जा रहा है। इससे न केवल सैन्य बल्कि आर्थिक और तकनीकी नुकसान भी हो सकता है।
फिलहाल मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच यह चिंता बढ़ती जा रही है कि अगर डेटा सेंटरों पर हमले जारी रहे तो इंटरनेट सेवाओं, क्लाउड प्लेटफॉर्म और वैश्विक डिजिटल नेटवर्क पर व्यापक असर पड़ सकता है। इसलिए कई देशों और टेक कंपनियों ने अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की सुरक्षा को और मजबूत करने की तैयारी शुरू कर दी है।
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