रमजान 2026: तीसरा अशरा शुरू, मस्जिदों में एतिकाफ का आगाज; शबे कद्र की पहली रात इबादत में गुजरी


 पवित्र माह रमजान के आखिरी दस दिनों की शुरुआत हो चुकी है। मंगलवार शाम से रमजान का तीसरा अशरा, जिसे ‘जहन्नम से आजादी का अशरा’ कहा जाता है, शुरू हो गया। इस मौके पर शहर की मस्जिदों में विशेष धार्मिक माहौल देखने को मिला। रोजेदारों ने इफ्तार से पहले विभिन्न मस्जिदों में एतिकाफ की शुरुआत की और इबादत में मशगूल हो गए।

इस्लाम में रमजान के आखिरी दस दिन बेहद खास माने जाते हैं। इन दिनों में अल्लाह की इबादत, दुआ और तौबा को विशेष महत्व दिया जाता है। इसी दौरान शबे कद्र भी आती है, जिसे इस्लाम में हजार महीनों से बेहतर रात माना गया है। माना जाता है कि इस मुबारक रात में की गई इबादत और दुआ का सवाब कई गुना बढ़ जाता है।

रमजान के तीसरे अशरे की शुरुआत के साथ ही कई रोजेदार मस्जिदों में एतिकाफ में बैठ गए हैं। एतिकाफ एक खास इबादत होती है, जिसमें व्यक्ति मस्जिद में रहकर पूरी तरह अल्लाह की इबादत, कुरान की तिलावत और दुआ में समय बिताता है। एतिकाफ करने वाले लोग दुनिया की व्यस्तताओं से दूर रहकर आध्यात्मिक साधना में लगे रहते हैं।

शबे कद्र की पहली रात को मस्जिदों में बड़ी संख्या में नमाजी पहुंचे। लोगों ने देर रात तक नमाज अदा की, कुरान शरीफ की तिलावत की और देश-दुनिया में अमन और खुशहाली के लिए दुआएं मांगीं। कई मस्जिदों में विशेष नमाज और धार्मिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया गया।

धार्मिक विद्वानों के अनुसार रमजान के आखिरी दस दिन आत्मिक शुद्धि और अल्लाह से करीब होने का सबसे अच्छा समय माने जाते हैं। इस दौरान ज्यादा से ज्यादा इबादत, दान और नेक काम करने की सलाह दी जाती है।

रमजान का तीसरा अशरा शुरू होते ही मस्जिदों में रौनक और बढ़ गई है। रोजेदार पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ इबादत में लगे हुए हैं और शबे कद्र की बरकतें हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

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