भारतीय वायुसेना का बहुप्रतीक्षित अभ्यास ‘वायु शक्ति-2026’ इस बार रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है। 27 फरवरी को Pokhran फायरिंग रेंज में आयोजित होने वाले इस युद्धाभ्यास में 120 से अधिक लड़ाकू और परिवहन विमान हिस्सा लेंगे। यह इलाका पाकिस्तान सीमा के नजदीक है, जिससे अभ्यास का सामरिक महत्व और बढ़ जाता है।
हालांकि, इस बड़े आयोजन से पहले स्वदेशी लड़ाकू विमान HAL Tejas की भागीदारी पर संशय बना हुआ है। जानकारी के मुताबिक, कुछ तेजस विमानों में तकनीकी खराबी सामने आने के बाद उनकी विस्तृत जांच की जा रही है। सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए अंतिम निर्णय जांच रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा।
राफेल और सुखोई रहेंगे केंद्र में
अभ्यास में वायुसेना के अत्याधुनिक लड़ाकू विमान Dassault Rafale और Sukhoi Su-30MKI प्रमुख आकर्षण होंगे। ये विमान हवा से जमीन और हवा से हवा में मार करने की अपनी क्षमता का प्रदर्शन करेंगे। इसके अलावा मिराज-2000, जगुआर, अपाचे हेलीकॉप्टर, परिवहन विमान और ड्रोन भी अभ्यास का हिस्सा बन सकते हैं।
क्यों अहम है यह अभ्यास?
‘वायु शक्ति’ भारतीय वायुसेना की ऑपरेशनल तैयारी और युद्धक क्षमता को परखने का मंच है। इसमें लाइव हथियारों के साथ लक्ष्य भेदन, नेटवर्क-सेंट्रिक वारफेयर और संयुक्त अभियान की क्षमता का प्रदर्शन किया जाता है। यह अभ्यास न केवल सेना के लिए बल्कि सामरिक संदेश के तौर पर भी महत्वपूर्ण होता है।
तेजस पर नजर
तेजस भारत का स्वदेशी लड़ाकू विमान है और ‘मेक इन इंडिया’ पहल का अहम प्रतीक माना जाता है। ऐसे में इसकी संभावित अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी हुई है। हालांकि, वायुसेना ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा सर्वोपरि है और तकनीकी जांच पूरी होने के बाद ही अंतिम फैसला होगा।
कुल मिलाकर, ‘वायु शक्ति-2026’ के जरिए भारतीय वायुसेना अपनी ताकत और तत्परता का प्रदर्शन करने जा रही है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या तेजस इस शक्ति प्रदर्शन का हिस्सा बन पाएगा या नहीं।
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