भारत और अमेरिका के बीच संभावित ट्रेड डील को लेकर चल रही बातचीत के बीच एक बड़ा झटका लगा है।
Donald Trump ने भारत से आयात होने वाले सोलर पैनलों पर 126% का प्रारंभिक टैरिफ (शुल्क) लगाने की घोषणा की है। इस फैसले के बाद दोनों देशों के व्यापारिक रिश्तों पर सवाल खड़े हो गए हैं और उद्योग जगत में हलचल तेज हो गई है।
क्या है पूरा मामला?
अमेरिका का कहना है कि भारतीय सोलर कंपनियों को कथित तौर पर सरकारी सब्सिडी का फायदा मिलता है, जिससे वे अमेरिकी बाजार में कम कीमत पर उत्पाद बेच पाती हैं। इसे अमेरिकी घरेलू निर्माताओं के लिए नुकसानदायक बताया जा रहा है। इसी आधार पर भारत से आने वाले सोलर पैनलों पर भारी शुल्क लगाने का निर्णय लिया गया है।
यह कदम ऐसे समय में आया है जब India और United States के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह टैरिफ निर्णय ट्रेड डील की दिशा और गति दोनों को प्रभावित कर सकता है।
भारतीय सोलर इंडस्ट्री पर असर
अमेरिका भारतीय सोलर उत्पादों के लिए एक बड़ा निर्यात बाजार है। 126% टैरिफ लागू होने से भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता पर सीधा असर पड़ सकता है। निर्यात महंगा होने से ऑर्डर कम हो सकते हैं और कंपनियों की आय पर दबाव बढ़ सकता है। साथ ही, निवेश और विस्तार योजनाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।
क्या होगा आगे?
व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला प्रारंभिक (प्रोविजनल) है और अंतिम निर्णय जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद लिया जाएगा। भारत सरकार कूटनीतिक और कानूनी स्तर पर इस मुद्दे को उठा सकती है। विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के तहत भी इस पर आपत्ति दर्ज कराई जा सकती है।
व्यापक असर
सोलर सेक्टर केवल व्यापार का मुद्दा नहीं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा और जलवायु लक्ष्यों से भी जुड़ा है। अगर टैरिफ लंबे समय तक लागू रहता है, तो इससे वैश्विक सोलर सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।
कुल मिलाकर, 126% टैरिफ का फैसला इंडिया-US व्यापार संबंधों में नई अनिश्चितता लेकर आया है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि दोनों देश बातचीत के जरिए समाधान निकालते हैं या यह मामला बड़े व्यापारिक विवाद का रूप लेता है।
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