सूत्रों के अनुसार, रक्षा सचिव Pete Hegseth ने एंथ्रोपिक के सीईओ Dario Amodei को तलब किया है। बताया जा रहा है कि बैठक में कंपनी को अपनी नीतियों पर पुनर्विचार करने के लिए अल्टीमेटम दिया जा सकता है।
विवाद की जड़ क्या है?
एंथ्रोपिक की एआई प्रणाली Claude को ‘सुरक्षित और जिम्मेदार एआई’ के सिद्धांतों के तहत विकसित किया गया है। कंपनी का स्पष्ट रुख है कि उसकी तकनीक का उपयोग स्वायत्त हथियार प्रणालियों, घातक सैन्य अभियानों या निगरानी आधारित जासूसी कार्यों में नहीं किया जाना चाहिए।
वहीं पेंटागन का तर्क है कि उन्नत एआई का इस्तेमाल रणनीतिक विश्लेषण, साइबर सुरक्षा, युद्ध-क्षेत्र डेटा प्रोसेसिंग और खुफिया विश्लेषण में बेहद उपयोगी हो सकता है। रक्षा विभाग का मानना है कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा, खासकर चीन जैसे देशों के साथ तकनीकी दौड़ में अमेरिका को एआई क्षमता का पूरा लाभ उठाना चाहिए।
नैतिकता बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा
यह टकराव व्यापक बहस को जन्म दे रहा है—क्या निजी एआई कंपनियों को अपनी तकनीक के सैन्य उपयोग पर नियंत्रण रखने का अधिकार होना चाहिए, या राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में सरकार को प्राथमिकता मिलनी चाहिए?
विशेषज्ञों का कहना है कि एआई के सैन्य उपयोग से जुड़े नैतिक और कानूनी प्रश्न अभी स्पष्ट नहीं हैं। स्वायत्त हथियार प्रणालियों, डेटा गोपनीयता और संभावित दुरुपयोग को लेकर चिंताएं लगातार बढ़ रही हैं।
आगे क्या?
अगर दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनती, तो सरकार एआई कंपनियों के साथ अपने अनुबंधों और साझेदारियों की समीक्षा कर सकती है। दूसरी ओर, एंथ्रोपिक अपने सिद्धांतों से समझौता करने को लेकर दबाव में आ सकती है।
कुल मिलाकर, यह विवाद केवल एक कंपनी और रक्षा विभाग के बीच मतभेद नहीं, बल्कि एआई के भविष्य और उसके सैन्य उपयोग की सीमाओं पर चल रही वैश्विक बहस का हिस्सा है।
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