अमेरिका में स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के तेजी से बढ़ते उपयोग को लेकर
United States Congress में गंभीर बहस हुई। सांसदों ने इस बात पर चिंता जताई कि जहां एक ओर एआई शिक्षा को आधुनिक और प्रभावी बना रहा है, वहीं इसके गलत इस्तेमाल के मामले भी बढ़ रहे हैं।
चर्चा के दौरान सामने आया कि सरकारी स्कूलों के लगभग 60 प्रतिशत शिक्षक किसी न किसी रूप में एआई टूल्स का उपयोग कर रहे हैं। शिक्षक पाठ योजना तैयार करने, प्रश्नपत्र बनाने, मूल्यांकन में सहायता लेने और छात्रों की व्यक्तिगत जरूरतों के अनुसार सामग्री तैयार करने में एआई का सहारा ले रहे हैं। कई शिक्षकों का मानना है कि एआई से उनका समय बचता है और वे छात्रों पर अधिक ध्यान केंद्रित कर पाते हैं।
हालांकि बहस में यह भी उजागर हुआ कि बड़ी संख्या में छात्र एआई टूल्स का उपयोग असाइनमेंट और प्रोजेक्ट तैयार करने में कर रहे हैं, और कई बार वे शिक्षकों को इसकी जानकारी नहीं देते। इससे शैक्षणिक ईमानदारी और मूल्यांकन प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कुछ सांसदों ने कहा कि यदि स्पष्ट दिशानिर्देश और निगरानी व्यवस्था नहीं बनाई गई, तो शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।
सांसदों ने इस मुद्दे पर संतुलित नीति बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि एआई को पूरी तरह प्रतिबंधित करना समाधान नहीं है, बल्कि इसके जिम्मेदार और पारदर्शी उपयोग के लिए नियम तय किए जाने चाहिए। कई विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि स्कूलों में एआई साक्षरता (AI Literacy) को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए, ताकि छात्र इसके फायदे और सीमाओं दोनों को समझ सकें।
बहस के दौरान यह भी चर्चा हुई कि शिक्षकों को एआई के सुरक्षित और नैतिक उपयोग के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जाना चाहिए। नीति-निर्माताओं का मानना है कि एआई शिक्षा क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है, लेकिन इसके लिए स्पष्ट गाइडलाइन, डेटा सुरक्षा उपाय और शैक्षणिक ईमानदारी के मानक तय करना अनिवार्य होगा।
इस बहस ने यह स्पष्ट कर दिया है कि एआई अब शिक्षा प्रणाली का हिस्सा बन चुका है। चुनौती यह है कि इसे अवसर के रूप में अपनाते हुए दुरुपयोग को कैसे रोका जाए।
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