संयुक्त राष्ट्र के महासचिव António Guterres ने कहा है कि वैश्विक मंच पर भारत का स्थायी और रचनात्मक योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने जोर देकर कहा कि दुनिया और संयुक्त राष्ट्र के एजेंडे में भारत की भागीदारी लगातार मजबूत हुई है, जो वैश्विक संतुलन और बहुपक्षीय सहयोग के लिए सकारात्मक संकेत है।
एआई समिट से पहले दिए गए अपने वक्तव्य में गुटेरेस ने कहा कि आज की बदलती विश्व व्यवस्था में भारत जैसे उभरते देशों की भूमिका तेजी से बढ़ रही है। उन्होंने इसे “एक बड़ा और सकारात्मक ट्रेंड” बताया, जो वैश्विक शासन प्रणाली को अधिक समावेशी और प्रतिनिधिक बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
महासचिव ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत ने शांति स्थापना, जलवायु परिवर्तन, सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) और मानवीय सहायता जैसे कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में निरंतर योगदान दिया है। भारत की सक्रिय भागीदारी न केवल विकासशील देशों की आवाज को मजबूती देती है, बल्कि वैश्विक निर्णय-प्रक्रिया को भी अधिक संतुलित बनाती है।
गुटेरेस ने विशेष रूप से तकनीक और नवाचार के क्षेत्र में भारत की प्रगति की सराहना की। उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) जैसे उभरते क्षेत्रों में भारत की भूमिका वैश्विक स्तर पर नई दिशा दे सकती है। एआई के जिम्मेदार और नैतिक उपयोग पर वैश्विक सहमति बनाने में भारत एक महत्वपूर्ण साझेदार बन सकता है।
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि बहुपक्षीय संस्थाओं को आज के समय में अधिक प्रभावी और जवाबदेह बनाने की आवश्यकता है। ऐसे में भारत जैसे लोकतांत्रिक और तेजी से विकसित हो रहे देश की भागीदारी वैश्विक सुधारों को गति दे सकती है।
महासचिव के बयान को ऐसे समय में अहम माना जा रहा है जब दुनिया जलवायु संकट, संघर्ष, आर्थिक अस्थिरता और तकनीकी बदलावों जैसी चुनौतियों से जूझ रही है। इन परिस्थितियों में भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका और संयुक्त राष्ट्र के साथ उसकी सक्रिय साझेदारी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए उम्मीद की किरण मानी जा रही है।
गुटेरेस के इस बयान ने स्पष्ट संकेत दिया है कि आने वाले समय में वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका और प्रभाव और भी अधिक मजबूत होने की संभावना है।
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