भारत में चिकित्सा तकनीक ने एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है। पहली बार 1200 किलोमीटर की दूरी पर बैठे डॉक्टरों ने 5G नेटवर्क और टेली-रोबोटिक तकनीक की मदद से एक साथ चार जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी कीं। यह उपलब्धि दिल्ली और गुजरात के विशेषज्ञ सर्जनों के समन्वय से संभव हो सकी, जिन्होंने बिना ऑपरेशन थिएटर में मौजूद हुए मरीजों का इलाज किया।
क्या है टेली-रोबोटिक सर्जरी?
टेली-रोबोटिक सर्जरी में सर्जन किसी दूरस्थ स्थान से रोबोटिक सिस्टम को नियंत्रित करता है। हाई-स्पीड और लो-लेटेंसी इंटरनेट कनेक्शन के जरिए डॉक्टर की हर मूवमेंट रियल-टाइम में ऑपरेशन थिएटर में मौजूद रोबोटिक आर्म तक पहुंचती है। इस मामले में 5G नेटवर्क ने बेहद अहम भूमिका निभाई, क्योंकि जटिल सर्जरी के दौरान एक सेकंड की भी देरी जोखिम बढ़ा सकती है।
किन सर्जरी को दिया गया अंजाम?
इस ऐतिहासिक पहल के तहत किडनी, गॉल ब्लैडर और हर्निया से जुड़ी कुल चार जटिल सर्जरी की गईं। सभी ऑपरेशन सफल रहे और मरीजों की स्थिति स्थिर बताई गई। डॉक्टरों ने अत्याधुनिक रोबोटिक प्लेटफॉर्म के माध्यम से सटीक चीरे लगाए, टिश्यू को नियंत्रित किया और आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कीं।
5G की क्या रही भूमिका?
5G नेटवर्क की हाई स्पीड और न्यूनतम लेटेंसी (Low Latency) इस पूरी प्रक्रिया की रीढ़ साबित हुई। पारंपरिक इंटरनेट कनेक्शन पर इतनी दूरी से सर्जरी करना जोखिम भरा हो सकता था, लेकिन 5G ने डॉक्टर और रोबोट के बीच लगभग रियल-टाइम कम्युनिकेशन संभव बनाया। इससे सर्जन को ऐसा अनुभव हुआ जैसे वे सीधे ऑपरेशन थिएटर में मौजूद हों।
भविष्य के लिए क्या मायने?
टेली-रोबोटिक सर्जरी ग्रामीण और दूरदराज़ क्षेत्रों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है। जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी है, वहां बड़े शहरों के विशेषज्ञ दूर से ही जटिल ऑपरेशन कर सकेंगे। इससे मरीजों को लंबी दूरी तय करने की जरूरत कम होगी और इलाज की पहुंच बढ़ेगी।
यह उपलब्धि न केवल भारत की डिजिटल और मेडिकल क्षमताओं को दर्शाती है, बल्कि यह भी बताती है कि 5G तकनीक स्वास्थ्य क्षेत्र में किस तरह क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। आने वाले समय में ऐसी और पहलें चिकित्सा सेवाओं को नई ऊंचाइयों तक ले जा सकती हैं।
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