देश की डिजिटल आधारभूत संरचना को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। टाटा कम्युनिकेशंस और रेलटेल कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने रणनीतिक साझेदारी की घोषणा की है, जिसके तहत भारतीय रेलवे के लगभग
63,000 किलोमीटर लंबे ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क को अत्याधुनिक क्लाउड और साइबर सुरक्षा समाधान से जोड़ा जाएगा।
क्या है इस सहयोग का उद्देश्य?
इस पहल का मुख्य लक्ष्य देशभर में फैले रेलवे के विशाल फाइबर नेटवर्क को अधिक सुरक्षित, विश्वसनीय और भविष्य-तैयार बनाना है। रेलटेल का नेटवर्क देश के सुदूर इलाकों तक फैला हुआ है और सरकारी संचार, ई-गवर्नेंस, बैंकिंग, रक्षा तथा अन्य संवेदनशील सेवाओं के लिए महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है।
टाटा कम्युनिकेशंस अपने क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर, मैनेज्ड सिक्योरिटी सर्विसेज और उन्नत साइबर थ्रेट मॉनिटरिंग सिस्टम के जरिए इस नेटवर्क को सुरक्षित बनाने में सहयोग करेगी।
क्या होंगे फायदे?
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डेटा सुरक्षा में बढ़ोतरी – सरकारी और संवेदनशील सूचनाओं की बेहतर सुरक्षा
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क्लाउड इंटीग्रेशन – डिजिटल सेवाओं की गति और स्केलेबिलिटी में सुधार
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राष्ट्रीय कनेक्टिविटी मजबूत – दूरदराज क्षेत्रों तक सुरक्षित नेटवर्क पहुंच
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साइबर हमलों से बचाव – रियल-टाइम मॉनिटरिंग और थ्रेट डिटेक्शन
क्यों है यह अहम?
भारत तेजी से डिजिटल अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहा है। ऐसे में मजबूत और सुरक्षित नेटवर्क इंफ्रास्ट्रक्चर राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक विकास दोनों के लिए जरूरी है। रेलवे का फाइबर नेटवर्क देश के सबसे बड़े और रणनीतिक नेटवर्क में से एक है, जिसे अब उन्नत साइबर सुरक्षा ढांचे से जोड़ा जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी न केवल डिजिटल इंडिया मिशन को गति देगी, बल्कि 5G, स्मार्ट सिटी, ई-गवर्नेंस और डिजिटल सेवाओं के विस्तार में भी अहम भूमिका निभाएगी।
कुल मिलाकर, टाटा कम्युनिकेशंस और रेलटेल का यह सहयोग भारत की डिजिटल संरचना को अधिक सुरक्षित, सक्षम और भविष्य के लिए तैयार बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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