टी20 विश्व कप में भारत और पाकिस्तान के बीच बहुप्रतीक्षित मुकाबला कोलंबो के प्रतिष्ठित R. Premadasa Stadium में खेला जाना है। यह मैदान अपनी धीमी और स्पिन के अनुकूल पिच के लिए जाना जाता है। ऐसे में मुकाबले का परिणाम काफी हद तक इस बात पर निर्भर कर सकता है कि कौन-सी टीम परिस्थितियों को बेहतर तरीके से भुनाती है।
पिच का मिजाज क्या कहता है?
आर. प्रेमादासा स्टेडियम की सतह आमतौर पर धीमी रहती है। नई गेंद से बल्लेबाजी अपेक्षाकृत आसान होती है, लेकिन जैसे-जैसे मैच आगे बढ़ता है, पिच टूटने लगती है और स्पिनरों को अतिरिक्त टर्न व ग्रिप मिलने लगती है। खासकर दूसरी पारी में बल्लेबाजों के लिए रन बनाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। यही वजह है कि यहां टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने की रणनीति अक्सर कारगर मानी जाती है।
वरुण बन सकते हैं गेम चेंजर?
भारत के रहस्यमयी स्पिनर Varun Chakravarthy ऐसी परिस्थितियों में बेहद खतरनाक साबित हो सकते हैं। उनकी विविधतापूर्ण गेंदबाजी—मिस्ट्री स्पिन, कैरम बॉल और तेज़ फ्लैटर डिलीवरी—धीमी पिच पर बल्लेबाजों को बांधकर रख सकती है। अगर पिच से टर्न और पकड़ मिलती है, तो वरुण पाकिस्तान के मध्यक्रम पर दबाव बना सकते हैं।
पाकिस्तान के बल्लेबाज आमतौर पर तेज गेंदबाजी के खिलाफ सहज दिखते हैं, लेकिन स्पिन के खिलाफ उनकी रणनीति पर अक्सर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में भारतीय टीम स्पिन आक्रमण के जरिए शुरुआती झटके देने की कोशिश करेगी।
रणनीति होगी अहम
टी20 जैसे छोटे फॉर्मेट में 2-3 ओवर का प्रभाव मैच का रुख बदल सकता है। कोलंबो की पिच पर स्पिनरों की भूमिका निर्णायक हो सकती है। भारत अगर बीच के ओवरों में रन गति पर अंकुश लगा लेता है, तो मुकाबले में बढ़त बना सकता है।
अब सबकी निगाहें इस बात पर होंगी कि मैच के दिन पिच का व्यवहार कैसा रहता है। अगर सतह उम्मीद के मुताबिक स्पिन फ्रेंडली रही, तो वरुण भारत के लिए सचमुच तुरुप का इक्का साबित हो सकते हैं।
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