Space Research: क्या अंतरिक्ष में इंसान जल्दी बूढ़ा हो जाता है? वैज्ञानिकों ने उम्र से जुड़े रहस्य का किया खुलासा


 क्या अंतरिक्ष की यात्रा इंसानी शरीर को समय से पहले बूढ़ा बना सकती है? यह सवाल लंबे समय से वैज्ञानिकों और आम लोगों—दोनों के मन में रहा है। अब एक नई वैज्ञानिक रिसर्च ने इस अनोखे रहस्य पर से पर्दा उठाया है। शोध के मुताबिक, अंतरिक्ष में रहने के दौरान मानव शरीर में कई ऐसे बदलाव होते हैं, जो तेजी से उम्र बढ़ने जैसे लगते हैं, लेकिन राहत की बात यह है कि धरती पर लौटने के बाद इनमें से कई असर अपने आप कम हो जाते हैं।

वैज्ञानिकों का कहना है कि अंतरिक्ष में माइक्रोग्रैविटी (शून्य गुरुत्वाकर्षण), रेडिएशन और बदले हुए दिन-रात के चक्र का सीधा असर शरीर पर पड़ता है। अंतरिक्ष यात्रियों की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, हड्डियों का घनत्व कम हो जाता है और इम्यून सिस्टम में भी बदलाव देखने को मिलता है। यही कारण है कि कुछ समय के लिए शरीर सामान्य उम्र से ज्यादा बूढ़ा महसूस कर सकता है।

रिसर्च में यह भी सामने आया है कि अंतरिक्ष में कोशिकाओं के स्तर पर बदलाव होते हैं। वैज्ञानिकों ने टेलोमेयर (DNA के सिरों पर मौजूद संरचना, जो उम्र से जुड़ी होती है) का अध्ययन किया और पाया कि अंतरिक्ष में इनकी लंबाई में असामान्य परिवर्तन हो सकते हैं। यह बदलाव धरती पर सामान्य उम्र बढ़ने की प्रक्रिया से अलग और तेज नजर आते हैं।

हालांकि, इस रिसर्च की सबसे दिलचस्प बात यह है कि ये प्रभाव स्थायी नहीं होते। जैसे ही अंतरिक्ष यात्री वापस धरती पर आते हैं, गुरुत्वाकर्षण और सामान्य वातावरण में ढलने के साथ शरीर धीरे-धीरे रिकवर करने लगता है। कुछ हफ्तों या महीनों में मांसपेशियां, हड्डियां और कोशिकाएं काफी हद तक अपनी पुरानी स्थिति में लौट आती हैं।

वैज्ञानिकों का मानना है कि यह खोज भविष्य की लंबी अंतरिक्ष यात्राओं—जैसे मंगल मिशन—के लिए बेहद अहम है। अगर इंसान को महीनों या सालों तक अंतरिक्ष में रहना है, तो यह समझना जरूरी है कि शरीर पर क्या असर पड़ता है और उससे कैसे निपटा जाए। इसी वजह से अंतरिक्ष यात्रियों के लिए खास एक्सरसाइज, डाइट और मेडिकल मॉनिटरिंग सिस्टम विकसित किए जा रहे हैं।

इस रिसर्च से यह भी संकेत मिलता है कि अंतरिक्ष में होने वाले ये बदलाव हमें धरती पर उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को समझने में भी मदद कर सकते हैं। वैज्ञानिकों को उम्मीद है कि इससे बुजुर्गों की सेहत और उम्र से जुड़ी बीमारियों पर नई रिसर्च का रास्ता खुलेगा।

कुल मिलाकर, अंतरिक्ष यात्रा भले ही कुछ समय के लिए शरीर को “तेजी से बूढ़ा” महसूस कराए, लेकिन यह स्थायी नहीं है। धरती पर लौटते ही शरीर में सुधार शुरू हो जाता है—और यही विज्ञान की सबसे बड़ी राहत और उपलब्धि मानी जा रही है।

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