Sankashti Chaturthi 2026: फाल्गुन संकष्टी चतुर्थी 4 या 5 फरवरी? जानिए सही तारीख, पूजा मुहूर्त और चंद्रोदय समय


 फाल्गुन माह की संकष्टी चतुर्थी को लेकर भक्तों के मन में अक्सर यह सवाल रहता है कि व्रत 4 फरवरी को रखा जाए या 5 फरवरी 2026 को। पंचांग के अनुसार, वर्ष 2026 में फाल्गुन संकष्टी चतुर्थी 5 फरवरी 2026 (गुरुवार) को मनाई जाएगी। यह व्रत भगवान गणेश को समर्पित होता है और इसे विशेष रूप से संतान सुख, आर्थिक समृद्धि और जीवन की बाधाओं से मुक्ति के लिए किया जाता है।

फाल्गुन संकष्टी चतुर्थी की सही तिथि

हिंदू पंचांग के अनुसार, चतुर्थी तिथि का आरंभ 4 फरवरी की रात में होगा, लेकिन उदयातिथि के अनुसार व्रत और पूजा 5 फरवरी को ही मान्य होगी। इसलिए श्रद्धालुओं को भ्रम में नहीं पड़ना चाहिए और व्रत 5 फरवरी को ही रखना चाहिए।

संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक महत्व

संकष्टी चतुर्थी का अर्थ है—संकटों से मुक्ति दिलाने वाली चतुर्थी। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से गणपति जी की पूजा करने से जीवन में आ रही परेशानियां दूर होती हैं। फाल्गुन माह की संकष्टी चतुर्थी का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन पूजा करने से

  • संतान प्राप्ति की कामना पूरी होती है

  • आर्थिक तंगी दूर होती है

  • ग्रहों की अशुभता कम होती है

  • मानसिक तनाव और बाधाएं समाप्त होती हैं

पूजा मुहूर्त (5 फरवरी 2026)

  • पूजा का शुभ समय: सुबह से लेकर चंद्रोदय तक

  • संकष्टी चतुर्थी में गणपति पूजन दिन में किया जाता है, लेकिन व्रत का पारण चंद्र दर्शन के बाद ही किया जाता है।

चंद्रोदय समय

  • चंद्रोदय समय: लगभग रात 9:30 बजे (स्थान के अनुसार कुछ मिनटों का अंतर संभव है)
    चंद्र दर्शन के बाद गणपति जी को अर्घ्य अर्पित कर व्रत खोला जाता है।

संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि

  1. सुबह स्नान कर व्रत का संकल्प लें

  2. भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें

  3. दूर्वा, मोदक, लड्डू और लाल फूल अर्पित करें

  4. “ॐ गण गणपतये नमः” मंत्र का जाप करें

  5. कथा सुनें या पढ़ें

  6. चंद्र दर्शन के बाद व्रत पारण करें

क्या रखें ध्यान

  • इस दिन दिनभर उपवास रखा जाता है

  • चंद्र दर्शन से पहले अन्न ग्रहण नहीं करना चाहिए

  • मन, वाणी और कर्म से शुद्धता बनाए रखें

निष्कर्ष
फाल्गुन संकष्टी चतुर्थी 2026 में 5 फरवरी को मनाई जाएगी। यह व्रत भगवान गणेश की विशेष कृपा पाने का श्रेष्ठ अवसर है। श्रद्धा और नियमों के साथ पूजा करने से जीवन के संकट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।

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