इन दिनों सेंधा नमक (रॉक सॉल्ट) का ट्रेंड तेजी से बढ़ा है। कई लोग इसे “ज्यादा नैचुरल” और “हेल्दी” मानते हैं। वहीं आयोडाइज्ड नमक दशकों से रोजमर्रा के भोजन का हिस्सा है। डॉक्टरों का कहना है कि दोनों के फायदे और सीमाएं अलग-अलग हैं, इसलिए सही जानकारी जरूरी है।
आयोडाइज्ड नमक क्यों जरूरी है?
आयोडाइज्ड नमक में आयोडीन मिलाया जाता है, जो थायरॉयड ग्रंथि के सही कामकाज के लिए बेहद जरूरी है।
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भारत जैसे देशों में आयोडीन की कमी एक बड़ी सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या रही है। इसलिए आयोडाइज्ड नमक को व्यापक रूप से अपनाया गया। विशेषज्ञों के अनुसार, रोजमर्रा के भोजन में आयोडाइज्ड नमक का इस्तेमाल सुरक्षित और फायदेमंद है।
सेंधा नमक के फायदे क्या हैं?
सेंधा नमक प्राकृतिक रूप से खनिजों से भरपूर माना जाता है।
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इसमें सोडियम क्लोराइड के साथ पोटैशियम, मैग्नीशियम जैसे सूक्ष्म तत्व थोड़ी मात्रा में हो सकते हैं।
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व्रत या उपवास में पारंपरिक रूप से इसका उपयोग होता है।
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कुछ लोगों को इसका स्वाद हल्का और कम तीखा लगता है।
हालांकि, वैज्ञानिक दृष्टि से देखा जाए तो इसमें मौजूद अतिरिक्त मिनरल्स की मात्रा बहुत कम होती है, जो स्वास्थ्य पर बड़ा प्रभाव नहीं डालती।
क्या सेंधा नमक आयोडीन की कमी पूरी कर सकता है?
नहीं। सेंधा नमक में प्राकृतिक रूप से पर्याप्त आयोडीन नहीं होता। यदि कोई व्यक्ति नियमित रूप से सिर्फ सेंधा नमक का उपयोग करता है और आयोडीन के अन्य स्रोत नहीं लेता, तो उसे आयोडीन की कमी का खतरा हो सकता है।
कितना नमक सुरक्षित है?
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, एक वयस्क को प्रतिदिन लगभग 5 ग्राम (एक चम्मच से कम) नमक से ज्यादा नहीं लेना चाहिए। चाहे सेंधा नमक हो या आयोडाइज्ड, अधिक मात्रा में सेवन हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोग का जोखिम बढ़ा सकता है।
निष्कर्ष
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रोजमर्रा के लिए: आयोडाइज्ड नमक अधिक सुरक्षित विकल्प है।
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कभी-कभार या स्वाद के लिए: सेंधा नमक इस्तेमाल किया जा सकता है।
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सबसे जरूरी बात: नमक की मात्रा नियंत्रित रखें।
डॉक्टरों का मानना है कि “कौन-सा नमक” से ज्यादा अहम है “कितना नमक”। संतुलित आहार और सीमित सेवन ही बेहतर स्वास्थ्य की कुंजी है।
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