Rinku Singh Father Death: अधूरा रह गया पिता का सपना, बेटे को दूल्हा बनते देखने की चाह पूरी न हो सकी


 भारतीय क्रिकेटर Rinku Singh के परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उनके पिता खानचंद का शुक्रवार सुबह निधन हो गया। वे लीवर कैंसर के स्टेज-4 से जूझ रहे थे। लंबे समय से चल रहे इलाज के बावजूद उनकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी और आखिरकार उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया।

खानचंद का एक बड़ा सपना अधूरा रह गया—वे अपने बेटे रिंकू सिंह को सेहरा बांधे दूल्हा बनते देखना चाहते थे। आर्थिक तंगी और संघर्षों से भरी जिंदगी जीने के बावजूद उन्होंने कभी अपने बेटे के सपनों को टूटने नहीं दिया। यही वजह है कि आज रिंकू जिस मुकाम पर हैं, उसमें उनके पिता के त्याग और मेहनत की अहम भूमिका रही है।

रिंकू सिंह का बचपन बेहद साधारण परिस्थितियों में बीता। परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। उनके पिता मेहनत-मजदूरी कर परिवार का पालन-पोषण करते थे। कई बार ऐसे हालात आए जब घर चलाना भी मुश्किल हो जाता था, लेकिन उन्होंने अपने बेटे को क्रिकेट खेलने से कभी नहीं रोका। गरीबी का बोझ खुद सहा, मगर बेटे के सपनों को पंख दिए।

क्रिकेट के शुरुआती दिनों में रिंकू को संसाधनों की कमी का सामना करना पड़ा। किट, जूते और ट्रैवल का खर्च जुटाना आसान नहीं था। ऐसे समय में उनके पिता ने हर संभव कोशिश की कि बेटे की ट्रेनिंग और मैचों में कोई रुकावट न आए। उनका विश्वास था कि एक दिन रिंकू देश के लिए खेलेंगे और परिवार का नाम रोशन करेंगे।

आज रिंकू सिंह भारतीय क्रिकेट में अपनी पहचान बना चुके हैं। मैदान पर उनके संघर्ष, आत्मविश्वास और धैर्य के पीछे उनके पिता की सीख और प्रेरणा साफ दिखाई देती है। खानचंद का जाना परिवार के लिए अपूरणीय क्षति है, लेकिन उनकी दी हुई हिम्मत और संस्कार रिंकू के साथ हमेशा रहेंगे।

पिता का सपना भले अधूरा रह गया हो, लेकिन उनका विश्वास और त्याग रिंकू सिंह की सफलता की कहानी में हमेशा अमर रहेगा।

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