जेनेटिक्स का बड़ा रोल
रिसर्च बताती है कि अगर परिवार में मां, नानी या दादी को बाल झड़ने की समस्या रही है, तो महिलाओं में इसका जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। इसे Female Pattern Hair Loss (FPHL) कहा जाता है, जिसमें सिर के ऊपर से बाल धीरे-धीरे पतले होने लगते हैं। यह समस्या अक्सर धीरे बढ़ती है, इसलिए महिलाएं इसे शुरुआती दौर में नजरअंदाज कर देती हैं।
हार्मोनल बदलाव और एस्ट्रोजन की कमी
महिलाओं के बालों की सेहत में एस्ट्रोजन हार्मोन की अहम भूमिका होती है। पीरियड्स की अनियमितता, PCOS, थायरॉयड, प्रेग्नेंसी के बाद का दौर, या मेनोपॉज के समय एस्ट्रोजन का स्तर गिरता है।
शोध बताते हैं कि एस्ट्रोजन की कमी से:
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हेयर ग्रोथ साइकिल छोटी हो जाती है
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बाल पतले और कमजोर होने लगते हैं
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झड़ने की गति तेज हो जाती है
यही कारण है कि हार्मोनल असंतुलन आज महिलाओं में हेयर लॉस की बड़ी वजह बन चुका है।
केमिकल कलर और स्टाइलिंग का असर
आधुनिक सौंदर्य आदतें भी इस समस्या को बढ़ा रही हैं। बार-बार हेयर कलर, स्ट्रेटनिंग, कर्लिंग, ब्लो-ड्राई और केमिकल ट्रीटमेंट बालों की जड़ों को नुकसान पहुंचाते हैं। इनमें मौजूद अमोनिया और अन्य केमिकल्स स्कैल्प को कमजोर कर देते हैं, जिससे बाल टूटने और झड़ने लगते हैं।
तनाव और पोषण की कमी
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में क्रॉनिक स्ट्रेस, नींद की कमी और अनहेल्दी डाइट भी हेयर लॉस को बढ़ावा दे रही है। आयरन, प्रोटीन, विटामिन D और B12 की कमी सीधे तौर पर बालों की ग्रोथ को प्रभावित करती है। विशेषज्ञ मानते हैं कि कई मामलों में हेयर फॉल शरीर की अंदरूनी पोषण समस्या का संकेत होता है।
क्या है समाधान?
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हार्मोनल जांच और सही इलाज
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केमिकल ट्रीटमेंट से दूरी
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संतुलित डाइट और तनाव प्रबंधन
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समय पर डर्मेटोलॉजिस्ट से सलाह
निष्कर्ष यही है कि महिलाओं में समय पूर्व बाल झड़ना सिर्फ ब्यूटी इश्यू नहीं, बल्कि शरीर के अंदर चल रहे असंतुलन का संकेत है। समय रहते कारण समझना और सही कदम उठाना ही बालों को बचाने का सबसे असरदार तरीका है।
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