दरअसल, जनरल नरवणे की किताब के कुछ अंश सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई। विपक्षी दलों का आरोप है कि किताब में जिन घटनाओं और फैसलों का जिक्र है, वे सरकार की भूमिका पर सवाल खड़े करते हैं। वहीं, सत्तारूढ़ भाजपा इस मुद्दे को कांग्रेस से जोड़ते हुए हमलावर हो गई है।
राहुल गांधी ने कहा कि देश की सेना और उसके पूर्व अधिकारियों की गरिमा पर सवाल उठाना ठीक नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनरल नरवणे एक सम्मानित सैन्य अधिकारी रहे हैं और उनकी ईमानदारी व पेशेवर आचरण पर किसी तरह का संदेह नहीं किया जाना चाहिए। राहुल ने यह भी जोड़ा कि अगर किताब सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है, तो उस पर पारदर्शी तरीके से चर्चा होनी चाहिए, न कि राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के जरिए।
इस पूरे मामले पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने कांग्रेस और राहुल गांधी से तीखे सवाल पूछे हैं। निशिकांत दुबे ने कहा कि अगर कांग्रेस को किताब की सामग्री पर भरोसा है, तो वह साफ बताए कि वह किन तथ्यों से सहमत है और किनसे नहीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस इस मुद्दे को राजनीतिक लाभ के लिए इस्तेमाल कर रही है।
भाजपा का कहना है कि सेना से जुड़े संवेदनशील मामलों को इस तरह सार्वजनिक बहस का हिस्सा बनाना राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से ठीक नहीं है। वहीं, कांग्रेस का तर्क है कि अगर कोई किताब बाजार में उपलब्ध है, तो उस पर सवाल उठाना और जवाब मांगना लोकतंत्र का हिस्सा है।
फिलहाल, जनरल नरवणे की किताब को लेकर सियासी बयानबाजी तेज हो चुकी है। एक तरफ राहुल गांधी पूर्व सेनाध्यक्ष के पक्ष में भरोसा जताते नजर आ रहे हैं, तो दूसरी ओर भाजपा इस मुद्दे पर कांग्रेस को घेरने में जुटी है। आने वाले दिनों में यह विवाद और तूल पकड़ सकता है, क्योंकि संसद के भीतर और बाहर इस पर बहस जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं।
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