Passive Smoking: पैसिव स्मोकिंग को हल्के में न लें, इन गंभीर बीमारियों का बढ़ा देता है जोखिम


 Passive Smoking Health Risks: पैसिव स्मोकिंग यानी दूसरे व्यक्ति द्वारा पी जा रही सिगरेट, बीड़ी या अन्य तंबाकू उत्पादों के धुएं को अनजाने में सांस के जरिए अंदर लेना। अक्सर लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते, लेकिन विशेषज्ञों के मुताबिक यह आदत न होने के बावजूद शरीर को उतना ही नुकसान पहुंचा सकती है जितना सक्रिय धूम्रपान।

पैसिव स्मोकिंग में दो तरह का धुआं शामिल होता है—एक जो स्मोकर बाहर छोड़ता है और दूसरा जो सिगरेट के जलते सिरे से निकलता है। इन दोनों में हजारों हानिकारक रसायन होते हैं, जिनमें निकोटिन, कार्बन मोनोऑक्साइड और कई कैंसरकारी तत्व शामिल हैं।

1. हृदय रोग का खतरा

पैसिव स्मोकिंग से दिल की बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है। यह धमनियों को संकुचित करता है, ब्लड प्रेशर बढ़ाता है और हार्ट अटैक की आशंका को बढ़ा सकता है।

2. फेफड़ों की समस्याएं

लंबे समय तक धुएं के संपर्क में रहने से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस और फेफड़ों के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर अधिक गंभीर हो सकता है।

3. कैंसर का जोखिम

विश्व स्वास्थ्य संगठनों के अनुसार, पैसिव स्मोकिंग भी फेफड़ों के कैंसर का कारण बन सकती है। धुएं में मौजूद जहरीले तत्व कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं।

4. गर्भवती महिलाओं और बच्चों पर असर

गर्भावस्था के दौरान धुएं के संपर्क में आने से शिशु के विकास पर बुरा असर पड़ सकता है। कम वजन, समय से पहले जन्म और श्वसन संबंधी समस्याएं बढ़ सकती हैं। बच्चों में बार-बार खांसी, कान के संक्रमण और एलर्जी की शिकायत भी हो सकती है।

5. कमजोर इम्यून सिस्टम

लगातार धुएं के संपर्क में रहने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि घर, ऑफिस और सार्वजनिक स्थानों पर स्मोक-फ्री वातावरण बनाए रखना बेहद जरूरी है। अगर आपके आसपास कोई धूम्रपान करता है, तो उससे दूरी बनाए रखें या धूम्रपान न करने का अनुरोध करें।

पैसिव स्मोकिंग को नजरअंदाज करना सेहत के लिए भारी पड़ सकता है। इसलिए जागरूक रहें और खुद को व अपने परिवार को इसके खतरों से सुरक्षित रखें।

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