भारत और अमेरिका के बीच मजबूत होते रणनीतिक और व्यापारिक संबंधों के बीच
भारतीय नौसेना की समुद्री ताकत जल्द और मजबूत होने वाली है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, भारत अमेरिका से
छह अतिरिक्त P-8I समुद्री गश्ती विमान खरीदने के बेहद करीब पहुंच गया है। यह सौदा न केवल भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग को नई ऊंचाई देगा, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की निगरानी और सुरक्षा क्षमता को भी कई गुना बढ़ाएगा।
P-8I विमान, अमेरिकी कंपनी बोइंग द्वारा निर्मित, दुनिया के सबसे आधुनिक लॉन्ग-रेंज मैरीटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट माने जाते हैं। भारतीय नौसेना पहले से ही ऐसे 12 विमान संचालित कर रही है, जिन्होंने पिछले कुछ वर्षों में अपनी उपयोगिता साबित की है। अब छह नए विमानों के शामिल होने से नौसेना की समुद्री निगरानी, पनडुब्बी रोधी युद्ध (Anti-Submarine Warfare) और इंटेलिजेंस मिशन की क्षमता और मजबूत होगी।
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, यह सौदा ऐसे समय में अहम है जब हिंद महासागर और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं। चीन की नौसैनिक मौजूदगी और पाकिस्तान के साथ उसके बढ़ते सैन्य सहयोग को देखते हुए भारत के लिए समुद्री सीमा पर कड़ी नजर रखना रणनीतिक रूप से बेहद जरूरी हो गया है। P-8I विमान लंबी दूरी तक उड़ान भरने, अत्याधुनिक रडार और सेंसर के जरिए दुश्मन की पनडुब्बियों और युद्धपोतों को ट्रैक करने में सक्षम हैं।
इन विमानों की खासियत यह है कि ये अंडरवॉटर वॉरफेयर, समुद्री गश्त, सर्च एंड रेस्क्यू और इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस जैसे कई मिशन एक साथ अंजाम दे सकते हैं। टॉरपीडो, मिसाइल और आधुनिक सोनार सिस्टम से लैस ये विमान नौसेना को किसी भी संभावित खतरे पर त्वरित प्रतिक्रिया देने में मदद करते हैं।
सूत्रों का कहना है कि यह डील भारत-अमेरिका व्यापार और रक्षा समझौते के तहत फॉरेन मिलिट्री सेल्स (FMS) प्रक्रिया के जरिए की जा सकती है। इससे डिलीवरी और मेंटेनेंस से जुड़ी प्रक्रियाएं अपेक्षाकृत तेज और आसान होंगी। साथ ही, भारत को लॉजिस्टिक सपोर्ट और ट्रेनिंग में भी फायदा मिलेगा।
कुल मिलाकर, छह नए P-8I विमानों की खरीद भारतीय नौसेना के लिए रणनीतिक बढ़त साबित होगी। इससे न केवल समुद्री सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की भूमिका एक प्रमुख सुरक्षा प्रदाता के रूप में और ज्यादा सशक्त होकर उभरेगी।
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