OverThinking: ओवरथिंकिंग दूर करने के लिए डॉक्टर ने बताए ये जरूरी स्टेप्स, आज से ही करें पालन


 आज की तेज़ रफ्तार और प्रतिस्पर्धा भरी जिंदगी में ओवरथिंकिंग एक आम लेकिन गंभीर समस्या बनती जा रही है। किसी बात, समस्या या फैसले के बारे में बार-बार, जरूरत से ज्यादा और नकारात्मक ढंग से सोचना न सिर्फ मानसिक शांति छीन लेता है, बल्कि धीरे-धीरे तनाव, एंग्जायटी और नींद की परेशानी का कारण भी बन सकता है। अच्छी बात यह है कि डॉक्टरों और मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, कुछ आसान और प्राकृतिक तरीकों से ओवरथिंकिंग पर काबू पाया जा सकता है।

1. अपने विचारों को पहचानें और नाम दें
डॉक्टरों का कहना है कि ओवरथिंकिंग रोकने का पहला कदम है उसे पहचानना। जब भी दिमाग किसी बात पर बार-बार अटक जाए, खुद से कहें—“यह ओवरथिंकिंग है।” सिर्फ इतना करना भी दिमाग को अलर्ट कर देता है और सोच की रफ्तार को धीमा करता है।

2. ‘क्या होगा’ से ‘क्या कर सकता हूं’ पर ध्यान दें
ओवरथिंकिंग में अक्सर “अगर ऐसा हो गया तो?” जैसे सवाल घूमते रहते हैं। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इन सवालों को एक्शन-बेस्ड सोच में बदलें। यानी डर या चिंता पर नहीं, बल्कि इस पर फोकस करें कि आप अभी क्या कर सकते हैं।

3. समय सीमा तय करें
किसी समस्या के बारे में सोचने के लिए खुद को सीमित समय दें, जैसे 10 या 15 मिनट। इसके बाद जानबूझकर ध्यान किसी और काम में लगाएं। यह तरीका दिमाग को ट्रेन करता है कि हर विचार अनंत नहीं है।

4. सांस और माइंडफुलनेस का सहारा लें
गहरी सांस लेना, ध्यान (मेडिटेशन) और माइंडफुलनेस एक्सरसाइज ओवरथिंकिंग कम करने में बेहद असरदार मानी जाती हैं। दिन में 5–10 मिनट भी अगर आप अपनी सांसों पर ध्यान दें, तो दिमाग अपने आप शांत होने लगता है।

5. लिखना बनाएं आदत
जो बातें दिमाग में घूमती रहती हैं, उन्हें कागज़ पर लिख लें। डॉक्टर मानते हैं कि जर्नलिंग से दिमाग हल्का होता है और विचारों में स्पष्टता आती है। कई बार लिखने के बाद ही समाधान नजर आने लगता है।

6. नींद, डाइट और स्क्रीन टाइम पर ध्यान दें
कम नींद, ज्यादा कैफीन और देर रात तक मोबाइल इस्तेमाल ओवरथिंकिंग को बढ़ाता है। नियमित नींद, संतुलित आहार और सीमित स्क्रीन टाइम मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।

7. खुद से नरमी से बात करें
खुद को बार-बार दोष देना ओवरथिंकिंग को और बढ़ाता है। डॉक्टर सलाह देते हैं कि खुद से वैसे ही बात करें जैसे आप किसी करीबी दोस्त से करते हैं—समझदारी और करुणा के साथ।

अगर इन स्टेप्स को रोज़मर्रा की जिंदगी में शामिल किया जाए, तो ओवरथिंकिंग धीरे-धीरे कम होने लगती है। याद रखें, दिमाग को कंट्रोल करना नहीं, बल्कि समझना और सही दिशा देना ही असली उपाय है।

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