बॉट्स के खिलाफ बड़ी तैयारी: OpenAI ला सकता है ‘ह्यूमन-ओनली’ सोशल नेटवर्क, Face ID से होगी यूजर्स की पहचान

 

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में अग्रणी कंपनी OpenAI अब सोशल मीडिया के क्षेत्र में कदम रखने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ChatGPT बनाने वाली यह कंपनी जल्द ही एक ऐसा सोशल नेटवर्क लॉन्च कर सकती है, जो पूरी तरह ‘ह्यूमन-ओनली’ होगा। यानी इस प्लेटफॉर्म पर सिर्फ असली इंसान ही अकाउंट बना सकेंगे और बॉट्स या फेक अकाउंट्स की कोई जगह नहीं होगी।

बताया जा रहा है कि OpenAI इस नए सोशल प्लेटफॉर्म को मौजूदा सोशल मीडिया से अलग और ज्यादा सुरक्षित बनाना चाहता है। आज के समय में X (पहले ट्विटर), फेसबुक और इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म्स पर बॉट्स, फेक प्रोफाइल और ऑटोमेटेड अकाउंट्स बड़ी समस्या बन चुके हैं। ये न सिर्फ गलत जानकारी फैलाते हैं, बल्कि पब्लिक ओपिनियन को भी प्रभावित करते हैं। OpenAI इसी समस्या से निपटने के लिए एक नया मॉडल तैयार कर रहा है।

Face ID और बायोमेट्रिक पहचान होगी सबसे बड़ी खासियत
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस प्लेटफॉर्म पर यूजर्स की पहचान के लिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन, जैसे Face ID या अन्य सुरक्षित पहचान तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना है कि हर अकाउंट किसी वास्तविक व्यक्ति से जुड़ा हो। एक बार पहचान सत्यापित हो जाने के बाद ही यूजर को प्लेटफॉर्म की पूरी सुविधाएं मिलेंगी।

हालांकि, OpenAI की ओर से अभी तक इस सोशल नेटवर्क को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन टेक इंडस्ट्री में इसे लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि यह प्लेटफॉर्म कंटेंट शेयरिंग, विचारों के आदान-प्रदान और AI-सहायता प्राप्त फीचर्स पर केंद्रित हो सकता है।

AI और सोशल मीडिया का नया मेल
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर OpenAI इस तरह का सोशल नेटवर्क लॉन्च करता है, तो यह सोशल मीडिया के मौजूदा ढांचे को चुनौती दे सकता है। यहां यूजर्स को ज्यादा भरोसेमंद बातचीत, कम फेक न्यूज और ज्यादा ऑथेंटिक इंटरैक्शन मिल सकता है। साथ ही, AI की मदद से कंटेंट मॉडरेशन और यूजर सेफ्टी को भी बेहतर बनाया जा सकता है।

प्राइवेसी को लेकर सवाल भी
हालांकि Face ID और बायोमेट्रिक पहचान का आइडिया जितना मजबूत लगता है, उतने ही सवाल प्राइवेसी को लेकर भी उठ रहे हैं। यूजर्स का बायोमेट्रिक डेटा कैसे सुरक्षित रहेगा, इसका इस्तेमाल किस तरह होगा—ये मुद्दे OpenAI के लिए बड़ी चुनौती बन सकते हैं।

कुल मिलाकर, अगर OpenAI का यह ‘ह्यूमन-ओनली’ सोशल नेटवर्क हकीकत बनता है, तो यह बॉट्स से भरी डिजिटल दुनिया में एक बड़ा बदलाव ला सकता है। यह देखना दिलचस्प होगा कि OpenAI इस आइडिया को किस रूप में और कब तक लोगों के सामने लाता है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ