Online Gaming Addiction: डोपामाइन असंतुलन से बिगड़ता मानसिक स्वास्थ्य, आवेग नियंत्रण कमजोर; बढ़ता है आत्महत्या का खतरा


 ऑनलाइन गेमिंग आज युवाओं और किशोरों के बीच मनोरंजन का सबसे लोकप्रिय साधन बन चुका है, लेकिन जरूरत से ज्यादा गेमिंग अब एक गंभीर मानसिक स्वास्थ्य चुनौती के रूप में सामने आ रही है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि ऑनलाइन गेमिंग की लत दिमाग में डोपामाइन के असंतुलन को जन्म देती है, जिससे व्यक्ति का व्यवहार, सोचने की क्षमता और भावनात्मक संतुलन प्रभावित होने लगता है।

डोपामाइन को “फील-गुड हार्मोन” कहा जाता है। गेम जीतने, लेवल बढ़ने या रिवॉर्ड मिलने पर दिमाग में इसका तेज स्राव होता है। लगातार ऐसा होने से दिमाग उसी त्वरित खुशी का आदी हो जाता है। नतीजतन, असल जिंदगी की पढ़ाई, काम, रिश्ते और जिम्मेदारियां फीकी लगने लगती हैं। यही स्थिति धीरे-धीरे गेमिंग एडिक्शन का रूप ले लेती है।

विशेषज्ञ बताते हैं कि इस लत का सबसे बड़ा असर आवेग नियंत्रण (Impulse Control) पर पड़ता है। व्यक्ति गुस्से, निराशा या हार को संभाल नहीं पाता। छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन, आक्रामक व्यवहार और बेचैनी बढ़ने लगती है। इसके साथ ही नींद की कमी, आंखों की थकान और शारीरिक गतिविधि में गिरावट भी आम लक्षण हैं।

मानसिक स्वास्थ्य पर इसका असर और भी गंभीर हो सकता है। डिप्रेशन, एंग्जायटी, अकेलापन और सामाजिक अलगाव ऑनलाइन गेमिंग की लत से जुड़े प्रमुख जोखिम हैं। कई युवा वास्तविक दुनिया से कटकर वर्चुअल दुनिया में ही अपनी पहचान तलाशने लगते हैं। जब गेम में हार, अकाउंट बैन या अपेक्षाएं पूरी नहीं होतीं, तो मानसिक दबाव और ज्यादा बढ़ जाता है।

कुछ गंभीर मामलों में विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि लगातार असफलता और भावनात्मक असंतुलन युवाओं को आत्मघाती विचारों की ओर भी धकेल सकता है। खासकर वे युवा जो पहले से तनाव, पारिवारिक दबाव या अकेलेपन से जूझ रहे हों, उनके लिए यह खतरा और बढ़ जाता है।

हालांकि अच्छी बात यह है कि समय रहते पहचान और सही मदद से इस समस्या से निपटा जा सकता है। स्क्रीन टाइम की सीमा तय करना, आउटडोर गतिविधियों को बढ़ावा देना, परिवार के साथ संवाद और जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की मदद बेहद जरूरी है।

अगर कोई युवा लगातार उदासी, गुस्सा या खुद को नुकसान पहुंचाने जैसे विचारों से जूझ रहा हो, तो इसे नजरअंदाज न करें। समय पर मदद लेना कमजोरी नहीं, बल्कि समझदारी है।

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