Obesity: मोटापे की जड़ पर सीधा अटैक, डॉक्टरों ने बताया असरदार तरीका


 दुनियाभर में बढ़ते मोटापे को लेकर चिंता लगातार गहराती जा रही है। हर साल 4 मार्च को World Obesity Day मनाया जाता है, जिसका उद्देश्य लोगों को मोटापे के खतरों और उससे बचाव के उपायों के बारे में जागरूक करना है।

इसी बीच हैदराबाद स्थित Asian Institute of Gastroenterology के एक अध्ययन में चौंकाने वाली बात सामने आई है। रिसर्च के मुताबिक भारतीयों में मोटापे की जेनेटिक संभावना (genetic predisposition) अपेक्षाकृत अधिक होती है। यानी, कुछ लोगों में परिवार से ही वजन बढ़ने की प्रवृत्ति मिलती है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि सही जीवनशैली अपनाकर इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

मोटापे की असली जड़ क्या है?

डॉक्टरों के अनुसार मोटापा केवल ज्यादा खाने से नहीं, बल्कि कई कारकों के मेल से होता है:

  • जेनेटिक कारण

  • शारीरिक गतिविधि की कमी

  • प्रोसेस्ड और हाई-कैलोरी फूड

  • नींद की कमी

  • लगातार तनाव

भारतीयों में खासतौर पर “एब्डॉमिनल ओबेसिटी” यानी पेट के आसपास चर्बी जमा होने का खतरा ज्यादा देखा जाता है, जो डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और हृदय रोगों का जोखिम बढ़ाता है।

डॉक्टरों ने क्या सुझाया?

विशेषज्ञों का कहना है कि मोटापे की जड़ पर हमला करने के लिए केवल डाइटिंग काफी नहीं है, बल्कि समग्र (holistic) दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है।

1. संतुलित आहार

  • फाइबर युक्त भोजन (सलाद, फल, साबुत अनाज)

  • कम शुगर और कम प्रोसेस्ड फूड

  • प्रोटीन की पर्याप्त मात्रा

2. नियमित व्यायाम

  • रोज कम से कम 30–45 मिनट की तेज वॉक

  • स्ट्रेंथ ट्रेनिंग या योग

  • लंबे समय तक बैठे रहने से बचाव

3. नींद और तनाव प्रबंधन

  • 7–8 घंटे की पर्याप्त नींद

  • मेडिटेशन और ब्रेथिंग एक्सरसाइज

  • स्क्रीन टाइम कम करना

क्या जेनेटिक्स को हराया जा सकता है?

डॉक्टरों का कहना है कि जीन हमारी प्रवृत्ति तय कर सकते हैं, लेकिन हमारा व्यवहार परिणाम तय करता है। यानी, यदि किसी व्यक्ति में मोटापे की पारिवारिक प्रवृत्ति है, तब भी हेल्दी लाइफस्टाइल अपनाकर वह वजन को नियंत्रित रख सकता है।

निष्कर्ष

मोटापा केवल सौंदर्य से जुड़ा मुद्दा नहीं, बल्कि गंभीर स्वास्थ्य जोखिम है। जागरूकता, नियमित जांच और जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव करके इस समस्या पर काबू पाया जा सकता है। सही समय पर कदम उठाकर “सेहत की बड़ी टेंशन” को दूर किया जा सकता है।

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