मोटापा आज भारत समेत पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्या बन चुका है। हाल ही में प्रतिष्ठित मेडिकल जर्नल The Lancet में प्रकाशित एक स्टडी ने बताया है कि सिर्फ मोटापा (Obesity) ही कई गंभीर और जानलेवा बीमारियों के खतरे को काफी बढ़ा सकता है—भले ही व्यक्ति को अन्य कोई बड़ी स्वास्थ्य समस्या न हो।
स्टडी में क्या सामने आया?
रिसर्च के अनुसार, मोटापा शरीर में:
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क्रॉनिक सूजन (chronic inflammation) बढ़ाता है
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हार्मोनल असंतुलन पैदा करता है
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इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ावा देता है
इन कारकों के कारण कई बीमारियों का खतरा स्वतः बढ़ जाता है।
मोटापे से जुड़ी प्रमुख बीमारियां
टाइप-2 डायबिटीज
अधिक वजन से इंसुलिन का प्रभाव कम हो जाता है, जिससे ब्लड शुगर लेवल बढ़ता है।
हृदय रोग
मोटापा हाई ब्लड प्रेशर, खराब कोलेस्ट्रॉल (LDL) और ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ाता है—जो दिल की बीमारी का बड़ा कारण हैं।
फैटी लिवर डिजीज
लिवर में अतिरिक्त फैट जमा होने से नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज (NAFLD) का खतरा बढ़ता है।
कुछ प्रकार के कैंसर
रिसर्च बताती है कि मोटापा स्तन, कोलन और लिवर कैंसर के जोखिम से जुड़ा हो सकता है।
जोड़ों की समस्या
अधिक वजन घुटनों और रीढ़ की हड्डी पर दबाव डालता है, जिससे ऑस्टियोआर्थराइटिस का खतरा बढ़ता है।
मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर
मोटापा सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। इससे डिप्रेशन, आत्मविश्वास में कमी और सामाजिक अलगाव की समस्या बढ़ सकती है।
क्या करें?
विशेषज्ञों के अनुसार:
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संतुलित आहार (कम शुगर और प्रोसेस्ड फूड)
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नियमित व्यायाम (कम से कम 30 मिनट रोज)
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पर्याप्त नींद
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तनाव प्रबंधन
इन आदतों से मोटापे को नियंत्रित किया जा सकता है।
निष्कर्ष
The Lancet की यह स्टडी साफ संकेत देती है कि मोटापा अपने आप में एक “साइलेंट रिस्क फैक्टर” है। इसे केवल बाहरी रूप या वजन की समस्या समझना गलत होगा। समय रहते जीवनशैली में बदलाव कर गंभीर बीमारियों के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
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