अब तक अंतरिक्ष यात्रियों को केवल मिशन-स्पेसिफिक उपकरणों और कैमरों का ही इस्तेमाल करने की इजाजत थी। लेकिन नई नीति के तहत सीमित और नियंत्रित उपयोग के लिए पर्सनल स्मार्टफोन ले जाने की छूट दी गई है। NASA का मानना है कि इससे न सिर्फ एस्ट्रोनॉट्स का मानसिक स्वास्थ्य बेहतर होगा, बल्कि आम लोगों को भी अंतरिक्ष को करीब से देखने का मौका मिलेगा।
इस बदलाव का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अंतरिक्ष से ली जाने वाली तस्वीरें और वीडियो पहले से कहीं ज्यादा रियल और पर्सनल होंगे। स्मार्टफोन कैमरे अब काफी एडवांस हो चुके हैं और एस्ट्रोनॉट्स इनके जरिए स्पेस स्टेशन, पृथ्वी और मिशन से जुड़े खास पलों को अलग अंदाज में कैप्चर कर सकेंगे। सोशल मीडिया और पब्लिक आउटरीच के लिहाज से भी यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है।
NASA ने साफ किया है कि स्मार्टफोन का इस्तेमाल कड़े नियमों और सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत ही किया जाएगा। इन डिवाइस को मिशन के कम्युनिकेशन सिस्टम से अलग रखा जाएगा, ताकि किसी भी तरह का साइबर या तकनीकी जोखिम न हो। साथ ही, यह फोन मुख्य मिशन गतिविधियों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप नहीं करेंगे।
Crew-12 मिशन, जो इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) से जुड़ा होगा, इस बदलाव की शुरुआत करेगा। वहीं, Artemis-2 मिशन, जो इंसानों को चंद्रमा के आसपास भेजने की NASA की महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा है, उसमें भी यह सुविधा दी जाएगी। माना जा रहा है कि चंद्र मिशन से आने वाली स्मार्टफोन-क्लिक की गई तस्वीरें इतिहास का हिस्सा बन सकती हैं।
कुल मिलाकर, NASA का यह फैसला दिखाता है कि अंतरिक्ष मिशन अब सिर्फ वैज्ञानिक प्रयोगों तक सीमित नहीं रह गए हैं। स्मार्टफोन की एंट्री से अंतरिक्ष यात्राएं ज्यादा मानवीय, जुड़ी हुई और प्रेरणादायक बनेंगी—जहां एस्ट्रोनॉट्स सिर्फ वैज्ञानिक नहीं, बल्कि अपनी आंखों से देखी अंतरिक्ष की कहानी दुनिया तक पहुंचाने वाले कथाकार भी होंगे।
0 टिप्पणियाँ