एआई शिखर सम्मेलन के औपचारिक उद्घाटन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक मंच से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को मानवता के लिए परिवर्तनकारी शक्ति बताया। इस सम्मेलन में 20 देशों के राष्ट्राध्यक्ष और शासन प्रमुख शामिल हुए। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि एआई दुनिया को बदलने की क्षमता रखता है, लेकिन इसके विकास और उपयोग में जिम्मेदारी, पारदर्शिता और नैतिकता बेहद जरूरी है।
एआई बदलाव की सबसे बड़ी तकनीकी ताकत
प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, जलवायु परिवर्तन और शासन जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। इससे उत्पादकता बढ़ेगी, सेवाएं बेहतर होंगी और नई संभावनाओं के द्वार खुलेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि एआई मानव क्षमता को सशक्त बनाने का माध्यम होना चाहिए, न कि उसे प्रतिस्थापित करने का।
जिम्मेदार और नैतिक उपयोग पर जोर
पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि एआई के विकास के साथ-साथ इसके दुरुपयोग को रोकने के लिए वैश्विक मानक और नियमन आवश्यक हैं। फेक न्यूज, साइबर अपराध और डेटा सुरक्षा जैसी चुनौतियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि एआई को नियंत्रित और पारदर्शी ढांचे में विकसित करना समय की मांग है।
मानव-केंद्रित एआई का समर्थन
उन्होंने “ह्यूमन-सेंट्रिक एआई” की अवधारणा को आगे बढ़ाने की बात कही। उनके अनुसार, तकनीक का उद्देश्य मानव जीवन को सरल, सुरक्षित और समृद्ध बनाना होना चाहिए। एआई का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे, इसके लिए समावेशी नीतियां बनाना जरूरी है।
ग्लोबल सहयोग की अपील
प्रधानमंत्री ने कहा कि एआई जैसी उभरती तकनीकों पर वैश्विक सहयोग अनिवार्य है। उन्होंने देशों से मिलकर साझा मानदंड और सुरक्षा ढांचा तैयार करने की अपील की, ताकि एआई का विकास मानव कल्याण के अनुरूप हो सके।
भारत की भूमिका
पीएम मोदी ने कहा कि भारत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और नवाचार के क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है और एआई के जिम्मेदार विकास में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है।
एआई शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री का संदेश स्पष्ट था—एआई भविष्य को आकार देने की ताकत रखता है, लेकिन इसे संतुलित, सुरक्षित और जिम्मेदार ढंग से आगे बढ़ाना पूरी दुनिया की साझा जिम्मेदारी है।
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