क्या कहता है सर्वे?
रिपोर्ट के मुताबिक, सर्वे में शामिल किशोरों में से लगभग हर पांच में से एक ने माना कि उन्हें ऐसी सामग्री दिखाई दी, जिसे वे देखना नहीं चाहते थे। यह आंकड़ा बच्चों और किशोरों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
दस्तावेजों में यह भी संकेत मिला कि कंपनी को इस समस्या की जानकारी थी और वह कंटेंट मॉडरेशन व सेफ्टी फीचर्स को बेहतर बनाने पर काम कर रही थी। हालांकि, आलोचकों का कहना है कि प्लेटफॉर्म की एल्गोरिदमिक सिफारिशें (recommendations) संवेदनशील आयु वर्ग के लिए जोखिम बढ़ा सकती हैं।
कानूनी पृष्ठभूमि
यह खुलासा उस समय हुआ जब अमेरिका में मेटा के खिलाफ नाबालिगों की मानसिक सेहत और ऑनलाइन सुरक्षा से जुड़े मामलों पर फेडरल स्तर पर सुनवाई चल रही है। कई राज्यों ने आरोप लगाया है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म युवाओं को हानिकारक सामग्री से पर्याप्त रूप से सुरक्षित नहीं रख पा रहे।
मेटा की प्रतिक्रिया
मेटा का कहना है कि उसने किशोर यूजर्स के लिए कई सुरक्षा उपाय लागू किए हैं, जिनमें:
कंपनी का दावा है कि वह एआई आधारित मॉडरेशन और रिपोर्टिंग सिस्टम को लगातार मजबूत कर रही है।
क्यों है चिंता का विषय?
विशेषज्ञों के मुताबिक, किशोरावस्था में इस तरह की सामग्री के संपर्क में आना मानसिक स्वास्थ्य, आत्म-छवि और व्यवहार पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। ऐसे में यह सर्वे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी और पारदर्शिता पर नई बहस छेड़ सकता है।
कुल मिलाकर, यह खुलासा डिजिटल युग में बच्चों की सुरक्षा को लेकर सख्त नीतियों और प्रभावी निगरानी तंत्र की आवश्यकता को रेखांकित करता है।
0 टिप्पणियाँ