Meta विवादों में: वाट्सएप की नई एआई नीति पर EU की चेतावनी, कहा- जिद नहीं छोड़ी तो होगी कार्रवाई


 EU Warning to WhatsApp: वाट्सएप की नई एआई नीति को लेकर मेटा कंपनी एक बार फिर विवादों में घिर गई है। यूरोपीय संघ (EU) ने मेटा को स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि उसने अपने प्लेटफॉर्म पर अन्य एआई चैटबॉट्स—जैसे चैटजीपीटी या परप्लेक्सिटी—की पहुंच सीमित करने या उन्हें रोकने की नीति नहीं बदली, तो उसके खिलाफ सख्त नियामकीय कार्रवाई की जा सकती है।

EU का आरोप है कि मेटा अपने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म वाट्सएप पर निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर रहा है। नियामकों का कहना है कि कंपनी केवल अपने ‘मेटा एआई’ को बढ़ावा देने के लिए प्रतिद्वंद्वी एआई सेवाओं के इंटीग्रेशन या उपयोग में बाधाएं पैदा कर रही है। यह कदम यूरोपीय डिजिटल बाजार के नियमों, खासकर प्रतिस्पर्धा और उपभोक्ता अधिकारों से जुड़े प्रावधानों के खिलाफ माना जा रहा है।

यूरोपीय आयोग के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि अगर मेटा ने अपनी नीति में बदलाव नहीं किया, तो उस पर भारी जुर्माना या अन्य कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं। EU के डिजिटल मार्केट्स एक्ट (DMA) के तहत बड़ी टेक कंपनियों पर निष्पक्ष और खुला डिजिटल इकोसिस्टम बनाए रखने की जिम्मेदारी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद केवल एआई चैटबॉट्स तक सीमित नहीं है, बल्कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिस्पर्धा और डेटा नियंत्रण के बड़े मुद्दे से जुड़ा है। अगर EU कड़ा रुख अपनाता है, तो इसका असर वैश्विक टेक कंपनियों की एआई रणनीतियों पर भी पड़ सकता है।

मेटा की ओर से अभी तक विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन कंपनी पहले भी यह कह चुकी है कि उसका उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को सुरक्षित और बेहतर एआई अनुभव देना है।

इस पूरे घटनाक्रम पर अब टेक इंडस्ट्री और नियामकों की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि मेटा अपनी नीति में बदलाव करता है या यूरोपीय संघ के साथ टकराव की स्थिति और गहराती है।

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