ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु डील को लेकर तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। दोनों देशों के बीच अभी तक किसी ठोस समझौते पर सहमति नहीं बन पाई है, लेकिन कूटनीतिक हलचल तेज हो गई है। इसी बीच ईरान के परमाणु कार्यक्रम के प्रमुख मोहम्मद एस्लामी का बयान सामने आया है, जिसने इस पूरे विवाद को नई दिशा दे दी है।

मोहम्मद एस्लामी ने कहा है कि अगर ईरान पर लगाए गए सभी अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध (सैंक्शन) पूरी तरह हटा लिए जाते हैं, तो तेहरान अपने यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) के भंडार को कम करने पर विचार कर सकता है। यह बयान ऐसे समय आया है जब ईरान और अमेरिका के बीच लंबे समय से चले आ रहे परमाणु विवाद पर बातचीत एक बार फिर शुरू हुई है। इसे एक संभावित नरमी के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि अभी रास्ता काफी मुश्किल माना जा रहा है।

दूसरी ओर, अमेरिका में पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की भूमिका को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। खबरों के मुताबिक, ट्रंप ईरान को लेकर एक नई रणनीति पर काम कर रहे हैं। कट्टर रुख के लिए पहचाने जाने वाले ट्रंप पहले भी ईरान परमाणु समझौते से अमेरिका को बाहर निकाल चुके हैं। ऐसे में उनके नए प्लान को ईरान के लिए दबाव की राजनीति के तौर पर देखा जा रहा है। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप प्रशासन के करीबी सर्किल में ईरान पर सख्त कार्रवाई और शीर्ष नेतृत्व पर दबाव बनाने जैसे विकल्पों पर भी विचार हुआ है, हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। पश्चिमी मीडिया में यह चर्चा है कि अगर बातचीत विफल होती है, तो अमेरिका ईरान पर और कड़े कदम उठा सकता है। हालांकि ईरान ने साफ कर दिया है कि वह दबाव की भाषा में किसी भी तरह की डील स्वीकार नहीं करेगा।

ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को आशंका है कि तेहरान परमाणु हथियार बनाने की दिशा में आगे बढ़ सकता है। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच अविश्वास की खाई अब भी बनी हुई है।

कुल मिलाकर, ईरान-अमेरिका परमाणु डील को लेकर स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। एक तरफ प्रतिबंध हटने पर ईरान नरमी का संकेत दे रहा है, तो दूसरी ओर अमेरिका की सख्त रणनीति और ट्रंप के नए प्लान की चर्चाएं तनाव को और बढ़ा रही हैं। आने वाले समय में यह देखना अहम होगा कि बातचीत किसी समझौते तक पहुंचती है या फिर टकराव और गहराता है।