इन दिनों इंटरमिटेंट फास्टिंग (Intermittent Fasting) तेजी से लोकप्रिय हो रही है। वजन घटाने और फिट रहने के लिए लोग 16:8, 18:6 या 24 घंटे के फास्टिंग पैटर्न अपनाने लगे हैं। लेकिन बिना डॉक्टर या न्यूट्रिशन एक्सपर्ट की सलाह के इसे शुरू करना कई बार नुकसानदायक साबित हो सकता है।
आइए जानते हैं इसके संभावित साइड इफेक्ट्स।
1. कमजोरी और चक्कर आना
लंबे समय तक भूखे रहने से शरीर में ब्लड शुगर लेवल गिर सकता है। इससे कमजोरी, सिरदर्द, चक्कर और थकान महसूस हो सकती है, खासकर शुरुआत के दिनों में।
2. पोषण की कमी
अगर खाने की खिड़की (Eating Window) में संतुलित आहार नहीं लिया गया तो शरीर को जरूरी विटामिन, मिनरल और प्रोटीन नहीं मिल पाते। इससे इम्यूनिटी कमजोर हो सकती है।
3. पाचन संबंधी समस्याएं
खाने के समय में ज्यादा मात्रा में भोजन लेने से एसिडिटी, गैस, ब्लोटिंग और अपच की समस्या हो सकती है।
4. हार्मोनल असंतुलन
महिलाओं में अत्यधिक या गलत तरीके से की गई फास्टिंग से हार्मोनल बदलाव, अनियमित पीरियड्स और थायरॉयड की दिक्कत बढ़ सकती है।
5. मानसिक प्रभाव
लगातार भूख की भावना से चिड़चिड़ापन, मूड स्विंग और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी हो सकती है।
6. किन लोगों को नहीं करनी चाहिए?
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गर्भवती या स्तनपान कराने वाली महिलाएं
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डायबिटीज के मरीज
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लो ब्लड प्रेशर वाले लोग
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किडनी या लीवर रोगी
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किशोर और बुजुर्ग
इन लोगों को बिना डॉक्टर की सलाह के इंटरमिटेंट फास्टिंग नहीं करनी चाहिए।
क्या है सही तरीका?
डॉक्टर या डाइटिशियन से सलाह लें
धीरे-धीरे शुरुआत करें
खाने की अवधि में पौष्टिक और संतुलित भोजन लें
पर्याप्त पानी पिएं
शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें
निष्कर्ष
इंटरमिटेंट फास्टिंग हर किसी के लिए सही नहीं होती। किसी दूसरे को देखकर या ट्रेंड के चलते इसे शुरू करना आपकी सेहत पर भारी पड़ सकता है। सही मार्गदर्शन और संतुलित आहार के साथ ही इसे अपनाएं, तभी यह लाभकारी हो सकती है।
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