Innovation: सिर्फ 20 सेकेंड में जम जाएगी बर्फ! ‘जादुई लिक्विड’ से डेटा सेंटर्स की सबसे बड़ी परेशानी होगी खत्म


 तेजी से बढ़ते AI और क्लाउड कंप्यूटिंग के दौर में डेटा सेंटर्स की सबसे बड़ी चुनौती है—हीट मैनेजमेंट। सर्वर जितना ज्यादा काम करते हैं, उतनी ही ज्यादा गर्मी पैदा होती है, जिसे कंट्रोल करना महंगा और मुश्किल होता जा रहा है। अब इस समस्या का चौंकाने वाला समाधान सामने आया है। चीन के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा खास कूलिंग लिक्विड विकसित किया है, जो महज 20 सेकेंड में पानी को बर्फ में बदल सकता है

इस नई तकनीक को Rapid Cooling Salt Liquid नाम दिया गया है। यह एक विशेष प्रकार का सॉल्ट-बेस्ड लिक्विड है, जो बेहद तेजी से तापमान को शून्य डिग्री सेल्सियस से नीचे गिराने की क्षमता रखता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, यह लिक्विड पारंपरिक कूलिंग सिस्टम्स के मुकाबले कई गुना ज्यादा प्रभावी और तेज है।

डेटा सेंटर्स के लिए क्यों है गेमचेंजर?

आज के AI डेटा सेंटर्स में हजारों हाई-परफॉर्मेंस चिप्स और सर्वर एक साथ काम करते हैं, जिससे भारी मात्रा में गर्मी पैदा होती है। मौजूदा कूलिंग सिस्टम्स—जैसे एयर कूलिंग और वाटर कूलिंग—या तो ज्यादा बिजली खपत करते हैं या फिर ज्यादा जगह और पानी की मांग करते हैं।
Rapid Cooling Salt Liquid सीधे हीट सोर्स के संपर्क में आकर सेकंड्स में गर्मी सोख लेता है, जिससे सर्वर का तापमान तुरंत नियंत्रित हो जाता है। इससे न सिर्फ ओवरहीटिंग का खतरा कम होगा, बल्कि सिस्टम की उम्र भी बढ़ेगी।

कैसे काम करता है यह जादुई लिक्विड?

वैज्ञानिकों के अनुसार, इस लिक्विड में मौजूद खास सॉल्ट कंपाउंड्स बहुत तेज़ी से हीट एब्जॉर्ब करते हैं। जैसे ही यह लिक्विड किसी गर्म सतह के संपर्क में आता है, यह तुरंत ऊर्जा खींच लेता है और तापमान तेजी से गिर जाता है। टेस्टिंग के दौरान देखा गया कि यह तकनीक 20 सेकेंड से भी कम समय में फ्रीजिंग लेवल तक पहुंच सकती है।

AI और भविष्य की तकनीक को मिलेगा बड़ा फायदा

AI मॉडल्स जितने बड़े और पावरफुल होते जा रहे हैं, उतनी ही ज्यादा कूलिंग की जरूरत पड़ रही है। यह नई तकनीक AI डेटा सेंटर्स, सुपरकंप्यूटर्स और हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग सिस्टम्स के लिए क्रांतिकारी साबित हो सकती है।
इसके अलावा, कम बिजली खपत के कारण यह तकनीक एनर्जी एफिशिएंट भी मानी जा रही है, जिससे कार्बन फुटप्रिंट घटाने में मदद मिल सकती है।

आगे क्या?

फिलहाल यह तकनीक रिसर्च और ट्रायल स्टेज में है, लेकिन शुरुआती नतीजे बेहद उत्साहजनक हैं। अगर इसे बड़े पैमाने पर लागू किया गया, तो आने वाले समय में डेटा सेंटर्स की डिजाइन और कूलिंग सिस्टम पूरी तरह बदल सकते हैं।

कुल मिलाकर, यह ‘जादुई लिक्विड’ सिर्फ एक नई खोज नहीं, बल्कि डिजिटल और AI युग की सबसे बड़ी समस्या का संभावित समाधान बनकर सामने आ रहा है।

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