क्या है ड्यूल-यूज AI टूल?
सेना द्वारा प्रस्तुत यह AI टूल इस तरह डिजाइन किया गया है कि इसका उपयोग सीमाओं पर निगरानी, खुफिया विश्लेषण और खतरे की पहचान के लिए किया जा सके। वहीं, यही तकनीक शहरों में आपदा प्रबंधन, ट्रैफिक कंट्रोल, सार्वजनिक सुरक्षा और अपराध रोकथाम जैसे नागरिक कार्यों में भी मददगार होगी।
इस सिस्टम में रियल-टाइम डेटा प्रोसेसिंग, इमेज रिकग्निशन, पैटर्न एनालिसिस और प्रेडिक्टिव अलर्ट जैसी क्षमताएं शामिल हैं, जो संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने में सक्षम हैं।
सरहद पर कैसे करेगा मदद?
सीमावर्ती इलाकों में यह AI समाधान ड्रोन और सेंसर से प्राप्त डेटा का विश्लेषण कर घुसपैठ या संदिग्ध गतिविधियों की पहचान कर सकता है। इससे त्वरित प्रतिक्रिया और बेहतर निर्णय-निर्माण संभव होगा। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में भी यह तकनीक सेना की निगरानी क्षमता को मजबूत करेगी।
शहरों में नागरिक सुरक्षा
ड्यूल-यूज होने के कारण यह टूल स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में भी उपयोगी साबित हो सकता है। भीड़ नियंत्रण, आपदा के दौरान राहत समन्वय, ट्रैफिक मॉनिटरिंग और सार्वजनिक स्थलों की सुरक्षा जैसे कार्यों में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे प्रशासन को रियल-टाइम अलर्ट और बेहतर रिस्पॉन्स मैकेनिज्म मिलेगा।
आत्मनिर्भरता और डेटा संप्रभुता पर जोर
यह पहल ‘मेक इन इंडिया’ और स्वदेशी तकनीकी विकास के दृष्टिकोण के अनुरूप है। सेना ने स्पष्ट किया कि सिस्टम को इस तरह विकसित किया गया है कि संवेदनशील डेटा देश के भीतर ही सुरक्षित रहे। इससे डेटा संप्रभुता मजबूत होगी और विदेशी तकनीकों पर निर्भरता घटेगी।
India AI Summit में प्रस्तुत यह ड्यूल-यूज AI टूल दर्शाता है कि भारत रक्षा और नागरिक सुरक्षा दोनों क्षेत्रों में अत्याधुनिक तकनीक के जरिए नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ रहा है। यह पहल भविष्य की सुरक्षा रणनीति में एआई की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित करती है।
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