India में बढ़ता साइबर खतरा हर हफ्ते 3,195 हमलों का सामना कर रहे संगठन


 भारत में साइबर हमलों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। एक नई साइबर सुरक्षा रिपोर्ट के मुताबिक, देश में संगठन हर सप्ताह औसतन 3,195 साइबर हमलों का सामना कर रहे हैं। यह आंकड़ा पिछले वर्ष की तुलना में उल्लेखनीय रूप से अधिक है, जो डिजिटल विस्तार के साथ बढ़ते जोखिमों की ओर इशारा करता है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि साइबर अपराधी अब पारंपरिक तरीकों से आगे बढ़कर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और ऑटोमेशन का उपयोग कर रहे हैं। इन उन्नत तकनीकों की मदद से हमले पहले से अधिक तेज, सटीक और जटिल हो गए हैं। एआई आधारित टूल्स के जरिए हैकर्स बड़े पैमाने पर फिशिंग ईमेल, मैलवेयर और ऑटोमेटेड अटैक लॉन्च कर पा रहे हैं, जिससे संगठनों की सुरक्षा व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।

सबसे ज्यादा निशाने पर शिक्षा क्षेत्र और सरकारी संस्थान हैं। स्कूल, विश्वविद्यालय और सरकारी विभागों के पास अक्सर बड़ी मात्रा में संवेदनशील डेटा होता है, जैसे व्यक्तिगत जानकारी और वित्तीय रिकॉर्ड, जो साइबर अपराधियों के लिए आकर्षक लक्ष्य बनता है। कई मामलों में कमजोर साइबर सुरक्षा ढांचा और सीमित तकनीकी संसाधन भी हमलों को आसान बना देते हैं।

रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि रैनसमवेयर हमले तेजी से बढ़ रहे हैं। इन हमलों में अपराधी सिस्टम को लॉक कर डेटा एन्क्रिप्ट कर देते हैं और उसे अनलॉक करने के बदले फिरौती की मांग करते हैं। इसके अलावा, सोशल इंजीनियरिंग जैसे हमले भी बढ़ रहे हैं, जिनमें लोगों को धोखे से संवेदनशील जानकारी साझा करने के लिए उकसाया जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन की रफ्तार के साथ साइबर सुरक्षा रणनीतियों को भी उतनी ही तेजी से मजबूत करना होगा। मल्टी-फैक्टर ऑथेंटिकेशन, नियमित सॉफ्टवेयर अपडेट, कर्मचारियों को साइबर जागरूकता प्रशिक्षण और एआई आधारित सुरक्षा समाधानों को अपनाना अब जरूरी हो गया है।

रिपोर्ट चेतावनी देती है कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो साइबर हमलों से आर्थिक और संस्थागत नुकसान और बढ़ सकता है। ऐसे में संगठनों को तकनीकी निवेश के साथ-साथ मजबूत साइबर नीति और जोखिम प्रबंधन ढांचा विकसित करने की आवश्यकता है, ताकि बढ़ते डिजिटल खतरों का प्रभावी ढंग से मुकाबला किया जा सके।

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