1. ऑस्ट्रेलिया बनाम ज़िम्बाब्वे (2003 विश्व कप)
2003 के वनडे विश्व कप में ऑस्ट्रेलिया और इंग्लैंड ने ज़िम्बाब्वे में खेलने से इनकार कर दिया था। वजह थी वहां की राजनीतिक स्थिति और खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर चिंता। दोनों टीमों को अंक तो मिले, लेकिन यह मामला क्रिकेट इतिहास के सबसे बड़े राजनीतिक बहिष्कारों में गिना जाता है।
2. न्यूज़ीलैंड का केन्या दौरा रद्द (1996 विश्व कप)
1996 विश्व कप के दौरान न्यूज़ीलैंड ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए केन्या में खेलने से मना कर दिया था। उस समय देश में अस्थिरता और सुरक्षा खतरों की आशंका जताई गई थी, जिसके चलते न्यूज़ीलैंड को मैच गंवाना पड़ा।
3. भारत-पाकिस्तान मैच रद्द (कई ICC इवेंट्स)
भारत और पाकिस्तान के बीच राजनीतिक तनाव का असर कई ICC टूर्नामेंटों में दिख चुका है। द्विपक्षीय सीरीज के साथ-साथ कुछ ICC आयोजनों में भी मुकाबलों को लेकर अनिश्चितता बनी रही। सुरक्षा और कूटनीतिक रिश्तों के चलते कई बार मैच नहीं हो पाए या आखिरी वक्त पर फैसले बदले गए।
4. इंग्लैंड का पाकिस्तान दौरे से इनकार (2021 के बाद प्रभाव)
हालांकि यह सीधे ICC टूर्नामेंट का मामला नहीं था, लेकिन इंग्लैंड द्वारा सुरक्षा कारणों से पाकिस्तान दौरा रद्द करने का असर ICC आयोजनों की तैयारियों पर भी पड़ा। इससे यह साफ हुआ कि सुरक्षा आशंकाएं आज भी क्रिकेट निर्णयों में बड़ी भूमिका निभाती हैं।
5. बांग्लादेश का हालिया मामला (टी20 विश्व कप 2026 से पहले)
हालिया घटनाक्रम में बांग्लादेश ने कुछ परिस्थितियों को लेकर असहमति जताई है। भले ही मामला नया लगे, लेकिन यह उसी लंबी परंपरा का हिस्सा है, जहां टीमें हालातों को देखते हुए कठोर फैसले लेती रही हैं।
निष्कर्ष
ICC टूर्नामेंटों का यह इतिहास बताता है कि क्रिकेट सिर्फ बल्ले और गेंद का खेल नहीं है। इसमें भू-राजनीति, सुरक्षा, कूटनीति और वैश्विक हालात बराबर की भूमिका निभाते हैं। टी20 विश्व कप 2026 से पहले यह बहस फिर याद दिलाती है कि मैदान के बाहर लिए गए फैसले, मैदान के भीतर के खेल को कितना प्रभावित कर सकते हैं।
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