अक्सर देखा जाता है कि
हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) के मरीज जैसे ही बीपी रीडिंग नॉर्मल देखते हैं,
बिना डॉक्टर से पूछे दवा बंद कर देते हैं। उन्हें लगता है कि अब समस्या खत्म हो गई है। लेकिन विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि यह आदत
सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। हाई बीपी एक
क्रॉनिक बीमारी है, जिसे कंट्रोल किया जा सकता है—खत्म नहीं।
बीपी नॉर्मल दिखना क्या मतलब रखता है?
दवा लेने से बीपी नॉर्मल होता है, न कि बीमारी ठीक होने से। दवा बंद करते ही बीपी दोबारा बढ़ सकता है—कई बार पहले से भी ज्यादा।
अचानक दवा बंद करने के 5 बड़े नुकसान
1. अचानक बीपी बढ़ने का खतरा (Rebound Hypertension)
दवा अचानक छोड़ने से बीपी तेजी से ऊपर जा सकता है। इससे चक्कर, सिरदर्द, बेचैनी और नाक से खून आने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
2. हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ता है
अनकंट्रोल्ड बीपी दिल और दिमाग की नसों पर दबाव डालता है। इससे हार्ट अटैक, स्ट्रोक और ब्रेन हेमरेज का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
3. किडनी को गंभीर नुकसान
हाई बीपी किडनी की छोटी नसों को नुकसान पहुंचाता है। दवा छोड़ने से किडनी फेलियर का रिस्क बढ़ सकता है, खासकर डायबिटीज वालों में।
4. आंखों की रोशनी पर असर
लगातार बढ़ा हुआ बीपी आंखों की रेटिना को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे धुंधला दिखना या स्थायी दृष्टि हानि तक हो सकती है।
5. दिल पर अतिरिक्त दबाव
बीपी बढ़ने से दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। लंबे समय में इससे हार्ट फेलियर का खतरा पैदा हो सकता है।
सही तरीका क्या है?
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दवा खुद से कभी बंद न करें
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अगर बीपी लगातार नॉर्मल है, तो डोज कम या दवा बदलने का फैसला डॉक्टर करें
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लाइफस्टाइल सुधारें: कम नमक, नियमित वॉक, वजन कंट्रोल, तनाव कम करें
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घर पर बीपी मॉनिटरिंग जारी रखें
निष्कर्ष
बीपी नॉर्मल होना अच्छी खबर है, लेकिन दवा बंद करना समझदारी नहीं। हाई ब्लड प्रेशर “साइलेंट किलर” है—लक्षण कम दिखते हैं, नुकसान ज्यादा करता है। इसलिए डॉक्टर की सलाह के बिना कोई बदलाव न करें। आपकी सावधानी ही आपकी सबसे बड़ी सुरक्षा है।
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