HbA1c Study India: भारत में डायबिटीज का सबसे भरोसेमंद टेस्ट क्यों दे रहा गलत संकेत? लैंसेट रिपोर्ट से बढ़ी चिंता


 भारत में डायबिटीज एक बड़ी स्वास्थ्य चुनौती बन चुकी है। करोड़ों लोग इस बीमारी से जूझ रहे हैं और इसके नियंत्रण के लिए HbA1c टेस्ट को सबसे भरोसेमंद तरीका माना जाता है। लेकिन अब मशहूर मेडिकल जर्नल The Lancet में प्रकाशित एक नई रिपोर्ट ने इस टेस्ट की भारत में सटीकता पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे डॉक्टरों और मरीजों दोनों की चिंता बढ़ गई है।

क्या है HbA1c टेस्ट और क्यों है अहम?

HbA1c टेस्ट पिछले 2 से 3 महीनों के औसत ब्लड शुगर लेवल को दिखाता है।

  • यह डायबिटीज की पहचान

  • बीमारी की गंभीरता

  • और इलाज कितना असरदार है

इन सबका आकलन करने में मदद करता है। इसी वजह से इसे डायबिटीज मैनेजमेंट का गोल्ड स्टैंडर्ड माना जाता है।

लैंसेट की रिपोर्ट में क्या सामने आया?

लैंसेट की रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय आबादी में HbA1c टेस्ट कई बार सही तस्वीर नहीं दिखाता
रिपोर्ट बताती है कि:

  • कुछ लोगों में HbA1c सामान्य आता है, जबकि ब्लड शुगर ज्यादा होती है

  • वहीं कुछ मामलों में HbA1c ज्यादा दिखता है, लेकिन शुगर कंट्रोल में होती है

इससे गलत डायग्नोसिस और गलत इलाज का खतरा बढ़ जाता है।

भारत में HbA1c टेस्ट सटीक क्यों नहीं?

विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे कई वजहें हैं:

1. एनीमिया की ज्यादा समस्या
भारत में आयरन डिफिशिएंसी एनीमिया आम है, जो HbA1c रिजल्ट को प्रभावित करता है।

2. हीमोग्लोबिन वैरिएंट्स
भारतीयों में कुछ खास प्रकार के हीमोग्लोबिन पाए जाते हैं, जो टेस्ट के नतीजों को बदल सकते हैं।

3. जेनेटिक फैक्टर
भारतीय शरीर में ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म अलग तरीके से काम करता है।

4. कुपोषण और संक्रमण
इन वजहों से भी HbA1c रीडिंग असंतुलित हो सकती है।

इसका असर मरीजों पर कैसे पड़ता है?

गलत HbA1c रिपोर्ट से:

  • किसी को बिना जरूरत डायबिटिक घोषित किया जा सकता है

  • या असली मरीज की पहचान देर से हो सकती है

  • दवाओं की डोज गलत हो सकती है

  • लंबे समय में हार्ट, किडनी और आंखों का खतरा बढ़ सकता है

डायबिटीज मॉनिटरिंग के लिए क्या करें?

विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि HbA1c के साथ:

  • फास्टिंग और पोस्टप्रांडियल शुगर टेस्ट

  • CGM (Continuous Glucose Monitoring)

  • और मरीज के लक्षणों

इन सबको मिलाकर निर्णय लिया जाए।

निष्कर्ष

लैंसेट की रिपोर्ट ने साफ कर दिया है कि भारत में सिर्फ HbA1c टेस्ट पर निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। डायबिटीज की सही पहचान और बेहतर इलाज के लिए मल्टी-टेस्ट अप्रोच अपनाना जरूरी है। समय रहते इस पर ध्यान नहीं दिया गया, तो डायबिटीज का बोझ और बढ़ सकता है।

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