जब भी दुनिया के किसी कोने में भू-राजनीतिक तनाव, युद्ध या आर्थिक अनिश्चितता बढ़ती है, निवेशकों का भरोसा सबसे पहले सोने (Gold) पर जाता है। ऐसी स्थितियों में सोने की मांग तेजी से बढ़ती है और इसके दामों में उछाल देखने को मिलता है। दूसरी ओर, बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को पारंपरिक रूप से सुरक्षित निवेश माना जाता है। ऐसे में सवाल उठता है—आखिर आपके पैसे के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प कौन सा है: गोल्ड या बैंक FD?
गोल्ड: संकट में सेफ हेवन
सोने को दुनिया भर में “सेफ हेवन एसेट” कहा जाता है। जब शेयर बाजार गिरते हैं, महंगाई बढ़ती है या भू-राजनीतिक तनाव गहराता है, तब निवेशक गोल्ड की ओर रुख करते हैं।
फायदे:
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वैश्विक संकट में कीमतें बढ़ने की संभावना
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महंगाई से बचाव (Inflation Hedge)
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लंबी अवधि में वैल्यू बनाए रखने की क्षमता
जोखिम:
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कीमतों में उतार-चढ़ाव
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कोई तय रिटर्न नहीं
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भौतिक सोने में स्टोरेज और सेफ्टी का खर्च
बैंक FD: स्थिरता और भरोसा
बैंक FD उन निवेशकों की पहली पसंद होती है, जो जोखिम से दूर रहना चाहते हैं। इसमें रिटर्न पहले से तय होता है और बाजार के उतार-चढ़ाव का असर नहीं पड़ता।
फायदे:
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गारंटीड रिटर्न
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पूंजी की सुरक्षा
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वरिष्ठ नागरिकों के लिए अतिरिक्त ब्याज
जोखिम:
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महंगाई के मुकाबले कम रिटर्न
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ब्याज पर टैक्स
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लंबे समय में पैसा “रीयल ग्रोथ” नहीं दे पाता
भू-राजनीतिक तनाव में कौन बेहतर?
जब वैश्विक तनाव बढ़ता है, तब सोना आमतौर पर FD से बेहतर प्रदर्शन करता है क्योंकि इसकी कीमतें बढ़ जाती हैं। वहीं FD में ब्याज वही रहता है, चाहे हालात जैसे भी हों। हालांकि, अगर तनाव जल्दी खत्म हो जाए और बाजार स्थिर हो जाए, तो सोने के दाम गिर भी सकते हैं।
किसके लिए कौन सही?
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जोखिम से डरने वाले निवेशक: बैंक FD
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महंगाई और संकट से बचाव चाहते हैं: गोल्ड
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लंबी अवधि का संतुलन: गोल्ड + FD का मिश्रण
नतीजा क्या है?
अगर सिर्फ सुरक्षा की बात करें, तो बैंक FD ज्यादा स्थिर और भरोसेमंद है। लेकिन अगर वैश्विक अनिश्चितता और महंगाई से बचाव चाहिए, तो गोल्ड बेहतर विकल्प साबित हो सकता है। समझदारी इसी में है कि दोनों में संतुलन बनाकर निवेश किया जाए, ताकि आपका पैसा सुरक्षित भी रहे और बढ़े भी।
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