Glucose-6-phosphate dehydrogenase deficiency: पुरुषों में क्यों बढ़ता है खतरा?


 जी6पीडी की कमी (G6PD Deficiency) एक आनुवंशिक ब्लड डिसऑर्डर है, जिसमें शरीर में ग्लूकोज-6-फॉस्फेट डिहाइड्रोजनेज (G6PD) एंजाइम की कमी हो जाती है। यह एंजाइम लाल रक्त कोशिकाओं (Red Blood Cells) को ऑक्सीडेटिव डैमेज से बचाने में अहम भूमिका निभाता है। जब यह एंजाइम पर्याप्त मात्रा में नहीं होता, तो रेड ब्लड सेल्स तेजी से टूटने लगती हैं, जिसे हीमोलिसिस कहा जाता है।

पुरुषों में ज्यादा क्यों होता है?

G6PD Deficiency एक X-लिंक्ड जेनेटिक डिसऑर्डर है।

  • पुरुषों में केवल एक X क्रोमोसोम होता है।

  • यदि उस X क्रोमोसोम में दोषपूर्ण जीन मौजूद है, तो बीमारी सीधे प्रकट हो जाती है।

  • महिलाओं में दो X क्रोमोसोम होते हैं, इसलिए अक्सर वे “कैरियर” होती हैं और गंभीर लक्षण कम दिखाई देते हैं।

इसी कारण पुरुषों में इसका खतरा अधिक होता है।

क्या होते हैं लक्षण?

जब कोई ट्रिगर (दवा, संक्रमण या कुछ खाद्य पदार्थ) शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ाता है, तो लक्षण अचानक सामने आ सकते हैं:

  • अचानक कमजोरी

  • पीली त्वचा (पीलिया)

  • गहरा रंग का पेशाब

  • सांस फूलना

  • दिल की धड़कन तेज होना

  • बच्चों में गंभीर एनीमिया

कुछ मामलों में नवजात शिशुओं में भी पीलिया का खतरा बढ़ जाता है।

किन चीजों से बढ़ सकता है खतरा?

G6PD Deficiency वाले लोगों को कुछ ट्रिगर्स से बचना चाहिए:

  • कुछ एंटीबायोटिक्स और मलेरिया की दवाएं

  • नेफ्थलीन (कपड़ों में रखी जाने वाली गोलियां)

  • फावा बीन्स (कुछ देशों में आम)

  • गंभीर संक्रमण

इलाज और बचाव

इस बीमारी का स्थायी इलाज नहीं है, क्योंकि यह आनुवंशिक है।
लेकिन सही सावधानियों से इसे नियंत्रित किया जा सकता है:

 ट्रिगर दवाओं से बचाव
 संक्रमण का समय पर इलाज
 नियमित ब्लड जांच
 डॉक्टर की सलाह से दवाएं लेना

गंभीर मामलों में ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जरूरत पड़ सकती है।

निष्कर्ष

G6PD Deficiency एक ऐसी बीमारी है जो अक्सर सामान्य जीवन में बिना लक्षण के रह सकती है, लेकिन ट्रिगर मिलने पर अचानक गंभीर रूप ले सकती है। खासकर पुरुषों में इसका खतरा ज्यादा होता है। जागरूकता, सही जांच और सावधानी ही इससे बचाव का सबसे बेहतर तरीका है।

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