Ghost gun: 3D-प्रिंटेड हथियारों की अब हो सकेगी पहचान, वैज्ञानिकों ने खोजा नया तरीका


 अब तक 3D-प्रिंटिंग तकनीक से बने तथाकथित ‘घोस्ट गन’ को लगभग अनट्रेसेबल यानी बिना पहचान वाले हथियार माना जाता था। इन हथियारों पर पारंपरिक सीरियल नंबर नहीं होते, इसलिए कानून प्रवर्तन एजेंसियों के लिए इन्हें ट्रैक करना बेहद मुश्किल होता था। लेकिन हालिया वैज्ञानिक अध्ययन में दावा किया गया है कि अब ऐसे हथियारों की पहचान संभव हो सकती है।

क्या है नई खोज?

शोधकर्ताओं के अनुसार, 3D-प्रिंटिंग में इस्तेमाल होने वाला प्लास्टिक फिलामेंट प्रत्येक निर्माता और बैच के हिसाब से अलग रासायनिक संरचना रखता है। यही रासायनिक “फिंगरप्रिंट” अब जांच एजेंसियों के लिए सुराग बन सकता है।

वैज्ञानिकों ने बताया कि इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोस्कोपी (Infrared Spectroscopy) जैसी उन्नत तकनीक से फिलामेंट की रासायनिक संरचना का विश्लेषण किया जा सकता है। इस प्रक्रिया में यह पता लगाया जा सकता है कि प्रिंटिंग के दौरान किस प्रकार की सामग्री इस्तेमाल हुई और उसका स्रोत क्या हो सकता है।

क्यों अहम है यह शोध?

3D-प्रिंटेड घोस्ट गन हाल के वर्षों में कई देशों में चिंता का विषय बनी हैं। चूंकि इन्हें घर पर उपलब्ध 3D प्रिंटर से बनाया जा सकता है और इनमें पारंपरिक पहचान चिह्न नहीं होते, इसलिए इनका दुरुपयोग रोकना चुनौतीपूर्ण रहा है।

नई तकनीक से:

  • जांच एजेंसियों को अपराध में इस्तेमाल हथियार के स्रोत तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।

  • अवैध हथियार निर्माण पर अंकुश लगाने की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है।

  • 3D-प्रिंटिंग सामग्री की सप्लाई चेन की निगरानी आसान हो सकती है।

क्या पूरी तरह खत्म हो जाएगी ‘अनट्रेसेबल’ की धारणा?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह तरीका पूरी तरह समाधान नहीं है, लेकिन जांच प्रक्रिया को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है। यदि फिलामेंट का डेटाबेस तैयार किया जाए, तो अलग-अलग निर्माताओं की रासायनिक पहचान को मिलान कर स्रोत का अनुमान लगाया जा सकता है।

कुल मिलाकर, यह शोध 3D-प्रिंटेड घोस्ट गन के खिलाफ लड़ाई में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक प्रगति माना जा रहा है। आने वाले समय में कानून और तकनीक के समन्वय से इस तरह के हथियारों की निगरानी और प्रभावी हो सकती है।

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