मैक्रों ने कहा कि भारत का डिजिटल आईडी सिस्टम करोड़ों लोगों को एकीकृत पहचान प्रदान करता है, जिससे सरकारी सेवाओं, बैंकिंग और सामाजिक योजनाओं तक पहुंच आसान हुई है। उन्होंने इसे तकनीक के माध्यम से सामाजिक समावेशन का बेहतरीन उदाहरण बताया। उनके अनुसार, डिजिटल पहचान ने पारदर्शिता और दक्षता को नई दिशा दी है।
डिजिटल भुगतान व्यवस्था की चर्चा करते हुए मैक्रों ने कहा कि भारत में जिस स्तर पर तेज, सुरक्षित और कम लागत वाले डिजिटल लेन-देन हो रहे हैं, वह विश्व के लिए प्रेरणादायक है। छोटे व्यापारियों से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक डिजिटल पेमेंट की पहुंच ने आर्थिक गतिविधियों को मजबूती दी है। उन्होंने कहा कि यह मॉडल वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने में बेहद प्रभावी साबित हुआ है।
इसके अलावा, मैक्रों ने भारत की डिजिटल हेल्थ आईडी प्रणाली की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में डिजिटल रिकॉर्ड और पहचान प्रणाली से मरीजों को बेहतर और त्वरित चिकित्सा सेवाएं मिल रही हैं। इससे स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच दोनों में सुधार हुआ है।
मैक्रों ने अपने संबोधन में यह भी कहा कि भारत और फ्रांस के बीच डिजिटल सहयोग की अपार संभावनाएं हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा और डेटा गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों में दोनों देश मिलकर काम कर सकते हैं। उन्होंने भारत के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन को भविष्य की वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत आधार बताया।
इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026 में मैक्रों के बयान ने भारत के डिजिटल मॉडल को वैश्विक मंच पर नई पहचान दिलाई है। यह स्पष्ट संकेत है कि भारत का डिजिटल ढांचा न केवल घरेलू विकास का आधार है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी एक आदर्श मॉडल के रूप में उभर रहा है।
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