नई राफेल डील से बदलेगा शक्ति संतुलन, Emmanuel Macron की यात्रा में बड़ा समझौता संभव


 ऑपरेशन ‘सिंदूर’ के बाद भारत ने अपनी हवाई ताकत को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रक्षा खरीद परिषद (DAC) ने 114 नए राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दे दी है। यह सौदा भारतीय वायुसेना की क्षमताओं को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने वाला माना जा रहा है।

इन अत्याधुनिक विमानों के शामिल होने से भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता 200 से 250 किलोमीटर तक और अधिक प्रभावी हो जाएगी। लंबी दूरी तक सटीक निशाना साधने की क्षमता, बेहतर एवियोनिक्स सिस्टम और उन्नत हथियार प्रणालियों के साथ राफेल विमान वायु युद्ध में निर्णायक बढ़त दिला सकते हैं।

फ्रांस के साथ रणनीतिक साझेदारी मजबूत

राफेल सौदा भारत और France के बीच रक्षा सहयोग को और मजबूत करेगा। माना जा रहा है कि फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की आगामी भारत यात्रा के दौरान इस समझौते को अंतिम रूप दिया जा सकता है। दोनों देशों के बीच पहले से ही मजबूत सामरिक संबंध हैं, और यह डील उन्हें नई दिशा दे सकती है।

राफेल लड़ाकू विमान फ्रांसीसी कंपनी Dassault Aviation द्वारा निर्मित हैं। इससे पहले भारत 36 राफेल विमान अपनी वायुसेना में शामिल कर चुका है, जो फिलहाल अंबाला और हाशिमारा एयरबेस से संचालन कर रहे हैं।

वायुसेना की ताकत में बड़ा इजाफा

114 नए विमानों के शामिल होने से भारतीय वायुसेना की स्क्वाड्रन क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। वर्तमान में स्क्वाड्रनों की संख्या जरूरत से कम मानी जा रही है, ऐसे में यह डील सामरिक संतुलन को मजबूत करेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे क्षेत्रीय सुरक्षा परिदृश्य में भारत की स्थिति और मजबूत होगी तथा संभावित खतरों से निपटने की क्षमता बढ़ेगी।

राफेल विमान आधुनिक रडार, इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर सिस्टम और हवा से हवा तथा हवा से जमीन पर मार करने वाली उन्नत मिसाइलों से लैस हैं। इससे सीमाओं पर त्वरित प्रतिक्रिया और गहरी स्ट्राइक क्षमता में बढ़ोतरी होगी।

कुल मिलाकर, यह नई राफेल डील भारतीय रक्षा क्षेत्र में एक अहम मील का पत्थर साबित हो सकती है। मैक्रों की यात्रा के दौरान यदि समझौता औपचारिक रूप से आगे बढ़ता है, तो यह भारत-फ्रांस रक्षा संबंधों में एक नई ऊंचाई जोड़ देगा और भारतीय वायुसेना को रणनीतिक बढ़त दिलाएगा।

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