EBV: एक बार संक्रमण और जीवनभर का खतरा, कैंसर से भी जुड़ा है ये वायरस; 95% लोग हो चुके हैं संक्रमित


 बीते एक दशक में दुनिया ने कई संक्रामक बीमारियों का सामना किया है। अब विशेषज्ञ जिस वायरस को लेकर चेतावनी दे रहे हैं, वह है Epstein-Barr virus (EBV)। यह वायरस इतना आम है कि अनुमान है दुनिया के 90–95% वयस्क अपने जीवन में कभी न कभी इससे संक्रमित हो चुके होते हैं। चिंता की बात यह है कि एक बार संक्रमण के बाद यह वायरस शरीर में जीवनभर निष्क्रिय अवस्था में बना रह सकता है।

क्या है एपस्टीन-बार वायरस?

EBV हर्पीस वायरस परिवार का हिस्सा है। यह मुख्य रूप से लार (saliva) के जरिए फैलता है, इसलिए इसे “किसिंग डिजीज” भी कहा जाता है। यह संक्रामक मोनोन्यूक्लिओसिस (Mononucleosis) का प्रमुख कारण है, जिसमें बुखार, गले में खराश, सूजी हुई लसीका ग्रंथियां और अत्यधिक थकान जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।

जीवनभर क्यों रहता है शरीर में?

संक्रमण के बाद EBV शरीर की B-लिम्फोसाइट कोशिकाओं में छिप जाता है। इम्यून सिस्टम इसे पूरी तरह खत्म नहीं कर पाता, बल्कि नियंत्रण में रखता है। कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली की स्थिति में यह दोबारा सक्रिय हो सकता है।

कैंसर से क्या है संबंध?

विशेषज्ञों के अनुसार EBV कुछ प्रकार के कैंसर से जुड़ा पाया गया है, जैसे:

  • नासोफैरिन्जियल कैंसर

  • बर्किट्स लिम्फोमा

  • हॉजकिन लिम्फोमा

  • कुछ गैस्ट्रिक (पेट) कैंसर

हालांकि, यह समझना जरूरी है कि हर संक्रमित व्यक्ति को कैंसर नहीं होता। कैंसर का खतरा कई अन्य कारकों—जैसे जेनेटिक्स, इम्यून सिस्टम और पर्यावरण—पर भी निर्भर करता है।

क्या हैं लक्षण?

अधिकांश मामलों में बचपन में संक्रमण बिना लक्षण के होता है। किशोर या युवावस्था में संक्रमण होने पर गंभीर लक्षण दिख सकते हैं:

  • तेज बुखार

  • गले में दर्द

  • अत्यधिक थकान

  • लिवर या स्प्लीन में सूजन

बचाव और सावधानी

  • संक्रमित व्यक्ति के साथ बर्तन या टूथब्रश साझा न करें

  • हाथों की स्वच्छता बनाए रखें

  • कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोग विशेष सावधानी बरतें

फिलहाल EBV के लिए कोई विशेष वैक्सीन उपलब्ध नहीं है, हालांकि इस पर शोध जारी है।

निष्कर्ष

एपस्टीन-बार वायरस बेहद आम है और अधिकांश लोग इससे संक्रमित हो चुके होते हैं। अधिकतर मामलों में यह गंभीर समस्या नहीं बनता, लेकिन कुछ स्थितियों में यह दीर्घकालिक स्वास्थ्य जोखिम और कैंसर से भी जुड़ सकता है। इसलिए जागरूकता और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेना बेहद जरूरी है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ