Donald Trump का बड़ा संकेत: क्या टैरिफ से बदला जाएगा इनकम टैक्स?


 अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने अपने स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन में संकेत दिया है कि भविष्य में टैरिफ (आयात शुल्क) से होने वाला राजस्व आयकर (इनकम टैक्स) की जगह ले सकता है। उन्होंने दावा किया कि भले ही Supreme Court of the United States ने कुछ टैरिफ प्रावधानों को रद्द कर दिया हो, फिर भी कई देश अमेरिका के साथ टैरिफ समझौतों को जारी रखना चाहते हैं।

ट्रंप ने कहा कि उनकी व्यापार नीति का मकसद अमेरिकी उद्योगों को मजबूत करना और विदेशी आयात पर निर्भरता कम करना है। उनके अनुसार, यदि टैरिफ से पर्याप्त राजस्व प्राप्त होता है, तो इससे अमेरिकी नागरिकों पर प्रत्यक्ष करों का बोझ घटाया जा सकता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि टैरिफ नीति के कारण अमेरिका को अरबों डॉलर का अतिरिक्त राजस्व मिला है।

क्या वास्तव में इनकम टैक्स खत्म हो सकता है?

अमेरिका में इनकम टैक्स संघीय राजस्व का एक बड़ा स्रोत है। इसे पूरी तरह समाप्त करना एक जटिल संवैधानिक और विधायी प्रक्रिया होगी। इसके लिए कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक होगी और कर संरचना में व्यापक बदलाव करने पड़ेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल टैरिफ से इतना राजस्व जुटाना कठिन होगा, जिससे आयकर पूरी तरह समाप्त किया जा सके।

टैरिफ बनाम आयकर: क्या है अंतर?

टैरिफ आयातित वस्तुओं पर लगाया जाने वाला कर है, जबकि आयकर सीधे नागरिकों और कंपनियों की आय पर लगाया जाता है। टैरिफ बढ़ाने से विदेशी वस्तुएं महंगी हो सकती हैं, जिसका असर घरेलू बाजार और उपभोक्ताओं पर पड़ता है। दूसरी ओर, आयकर सरकार की स्थिर और अनुमानित आय का प्रमुख साधन है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

ट्रंप ने यह भी कहा कि कई देश अमेरिकी टैरिफ समझौतों को जारी रखना चाहते हैं, क्योंकि वे अमेरिकी बाजार तक पहुंच बनाए रखना चाहते हैं। हालांकि, अतीत में टैरिफ बढ़ोतरी को लेकर व्यापारिक साझेदारों के साथ तनाव भी देखा गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, टैरिफ को आयकर का पूर्ण विकल्प बनाना फिलहाल व्यावहारिक नहीं दिखता, लेकिन ट्रंप का यह बयान भविष्य की कर नीति पर बहस को जरूर तेज कर सकता है।

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