गौरतलब है कि स्टीफन मिरान की नियुक्ति सितंबर 2025 में हुई थी। उन्होंने यह जिम्मेदारी उस समय संभाली थी, जब तत्कालीन गवर्नर एड्रियाना कुगलर ने अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। मिरान की नियुक्ति को उस वक्त एक स्थिरता लाने वाले कदम के तौर पर देखा गया था, क्योंकि वे आर्थिक मामलों में अनुभवी माने जाते हैं और नीति निर्माण में उनकी मजबूत पकड़ रही है।
हालांकि, स्टीफन मिरान का कार्यकाल शुरुआत से ही चर्चा में रहा। खास बात यह रही कि वे एक साथ दो अहम पदों पर बने हुए थे। एक तरफ वे अमेरिकी केंद्रीय बैंक से जुड़े गवर्नर की भूमिका निभा रहे थे, वहीं दूसरी ओर CEA के चेयरमैन के रूप में भी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। इस दोहरी भूमिका को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। कई विशेषज्ञों का मानना था कि इससे हितों के टकराव (Conflict of Interest) की स्थिति पैदा हो सकती है।
सूत्रों के मुताबिक, हाल के महीनों में व्हाइट हाउस, ट्रेजरी डिपार्टमेंट और केंद्रीय बैंक के बीच आर्थिक नीतियों को लेकर मतभेद गहराते गए थे। खासकर ब्याज दरों, महंगाई नियंत्रण और आर्थिक विकास की गति को लेकर अलग-अलग राय सामने आ रही थी। माना जा रहा है कि इन्हीं नीतिगत असहमतियों ने स्टीफन मिरान के इस्तीफे की जमीन तैयार की।
हालांकि, आधिकारिक बयान में मिरान ने अपने इस्तीफे को “व्यक्तिगत और पेशेवर कारणों” से जुड़ा बताया है। उन्होंने कहा कि CEA चेयरमैन के रूप में काम करना उनके लिए सम्मान की बात रही और उन्होंने अपनी टीम के साथ मिलकर अमेरिकी अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने की पूरी कोशिश की। साथ ही, उन्होंने राष्ट्रपति और प्रशासन का आभार भी जताया।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्टीफन मिरान का इस्तीफा ऐसे समय आया है, जब अमेरिका आर्थिक चुनौतियों, वैश्विक अनिश्चितताओं और घरेलू राजनीतिक दबावों से जूझ रहा है। ऐसे में यह बदलाव आने वाले दिनों में अमेरिकी आर्थिक नीति की दिशा को प्रभावित कर सकता है।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि स्टीफन मिरान की जगह CEA का नया चेयरमैन कौन होगा और क्या यह बदलाव अमेरिका की मौद्रिक और आर्थिक नीतियों में किसी बड़े परिवर्तन का संकेत देता है।
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