अब तक साइबर ठगी का मतलब था—फर्जी कॉल, लिंक या WhatsApp मैसेज। लेकिन अब ठगों ने इससे कहीं ज्यादा खतरनाक तरीका अपना लिया है। Fake BTS (Base Transceiver Station) यानी नकली मोबाइल टावर स्कैम ने न सिर्फ आम लोगों, बल्कि सुरक्षा एजेंसियों की भी चिंता बढ़ा दी है। इस नए फ्रॉड में आपका फोन बिना किसी सूचना के फर्जी मोबाइल नेटवर्क से जुड़ जाता है और आपको पता भी नहीं चलता कि आपकी सारी डिजिटल सुरक्षा खतरे में है।
क्या है Fake BTS या Fake Mobile Tower Scam?
BTS दरअसल मोबाइल टावर होता है, जिससे आपका फोन नेटवर्क से कनेक्ट होता है। स्कैमर्स अब पोर्टेबल और नकली BTS डिवाइस का इस्तेमाल कर रहे हैं, जो बिल्कुल असली टावर की तरह काम करता है। जैसे ही आपका फोन इस फर्जी टावर की रेंज में आता है, वह अपने आप असली नेटवर्क छोड़कर नकली नेटवर्क से जुड़ जाता है—वो भी बिना आपकी अनुमति के।
इसके बाद ठग आपके फोन पर आने वाले OTP, बैंक अलर्ट, कॉल और SMS तक पहुंच बना लेते हैं। कई मामलों में फोन 2G नेटवर्क पर शिफ्ट हो जाता है, क्योंकि वहां सिक्योरिटी कमजोर होती है और डेटा इंटरसेप्ट करना आसान होता है।
कैसे खाली हो रहे हैं बैंक अकाउंट?
फर्जी टावर से जुड़ते ही स्कैमर्स आपके बैंक OTP पकड़ लेते हैं। आपको लगता है नेटवर्क थोड़ा स्लो है या कॉल नहीं लग रही, लेकिन उसी वक्त ठग आपके अकाउंट से पैसे निकाल रहे होते हैं। SMS ब्लास्टर तकनीक के जरिए वे फर्जी मैसेज भेजकर आपको भ्रमित भी कर सकते हैं, ताकि आपको देर से शक हो।
सबसे खतरनाक बात यह है कि इसमें किसी लिंक पर क्लिक करना या कॉल उठाना जरूरी नहीं। आपका फोन सिर्फ पास में होने की वजह से ही जाल में फंस सकता है।
सुरक्षा एजेंसियां क्यों हैं परेशान?
Fake BTS स्कैम बेहद एडवांस और ट्रेस करना मुश्किल है। ये डिवाइस छोटे, पोर्टेबल और चलती गाड़ी से भी ऑपरेट किए जा सकते हैं। बड़े शहरों, वीआईपी इलाकों और भीड़-भाड़ वाले स्थानों में इसका इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। यही वजह है कि सुरक्षा एजेंसियां और टेलीकॉम कंपनियां अलर्ट पर हैं।
कैसे पहचानें और कैसे बचें?
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अगर आपका फोन बार-बार 2G नेटवर्क पर शिफ्ट हो रहा है, सतर्क हो जाएं
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बिना वजह नेटवर्क ड्रॉप या कॉल फेल हो रही हो, तो फोन रीस्टार्ट करें
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बैंकिंग ऐप्स के लिए SMS OTP के बजाय ऐप-बेस्ड ऑथेंटिकेशन चुनें
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फोन में ऑटो नेटवर्क सिलेक्शन बंद कर, मैन्युअली 4G/5G सेट करें
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संदिग्ध इलाके में फोन पर बैंक ट्रांजैक्शन से बचें
सबसे अहम सवाल यही है—क्या आपका फोन अभी जिस नेटवर्क से जुड़ा है, वो सच में असली टावर है? या कोई स्कैमर चुपचाप आपकी डिजिटल जिंदगी को कंट्रोल कर रहा है?
इस नए दौर में साइबर सेफ्टी सिर्फ सावधानी नहीं, जरूरत बन चुकी है।
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