भारत और अमेरिका के बीच हुए अंतरिम व्यापार समझौते की रूपरेखा सामने आ चुकी है। दोनों देशों ने इस समझौते को लेकर संयुक्त बयान जारी किया है, जिसे द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों के लिए एक अहम कदम माना जा रहा है। इस डील का मकसद टैरिफ कम करना, बाजार तक पहुंच आसान बनाना और व्यापारिक सहयोग को नई दिशा देना है। हालांकि, इस समझौते को लेकर देश की राजनीति भी गर्म हो गई है। सत्ता पक्ष और विपक्ष की प्रतिक्रियाएं एक-दूसरे से बिल्कुल उलट नजर आ रही हैं।
क्या है भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौता?
इस समझौते के तहत दोनों देशों ने कुछ प्रमुख क्षेत्रों में टैरिफ में कटौती और व्यापारिक बाधाएं कम करने पर सहमति जताई है। माना जा रहा है कि इससे भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच मिलेगी और निर्यात को बढ़ावा मिलेगा। सरकार इसे भविष्य में होने वाले व्यापक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की दिशा में पहला मजबूत कदम बता रही है।
राजनाथ सिंह बोले—निर्यात के लिए खुलेंगे नए रास्ते
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस समझौते का स्वागत करते हुए इसे भारत के लिए “निर्यात का बड़ा अवसर” बताया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका जैसे बड़े बाजार में भारतीय उत्पादों की पहुंच बढ़ने से उद्योगों को फायदा मिलेगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। राजनाथ सिंह के मुताबिक, यह समझौता ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को भी मजबूती देगा।
कांग्रेस का हमला—‘मोदी की हार, ट्रंप की जीत’
वहीं विपक्षी दल कांग्रेस ने इस समझौते पर सरकार को घेरते हुए तीखा हमला बोला है। कांग्रेस नेताओं ने इसे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की जीत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हार करार दिया। कांग्रेस का कहना है कि सरकार ने भारत के हितों से ज्यादा अमेरिका के दबाव में आकर समझौता किया है। पार्टी ने तंज कसते हुए कहा कि “हाउडी मोदी” जैसे आयोजनों का राजनीतिक फायदा तो लिया गया, लेकिन इस डील में भारत को अपेक्षित लाभ नहीं मिला।
अन्य प्रतिक्रियाएं भी आईं सामने
व्यापार विशेषज्ञों और उद्योग संगठनों की राय इस पर मिली-जुली रही है। कुछ विशेषज्ञ इसे भारतीय निर्यातकों के लिए सकारात्मक कदम बता रहे हैं, तो कुछ का मानना है कि असली तस्वीर तब साफ होगी जब समझौते के सभी प्रावधान जमीन पर लागू होंगे। एजेंसियों का कहना है कि टैरिफ कटौती से कुछ सेक्टर को तत्काल लाभ मिलेगा, लेकिन कुछ क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी।
आगे क्या?
सरकार का दावा है कि यह अंतरिम समझौता भारत-अमेरिका के आर्थिक रिश्तों को नई ऊंचाई देगा। वहीं विपक्ष इसे लेकर सवाल उठा रहा है। साफ है कि आने वाले समय में इस समझौते के वास्तविक असर—निर्यात, रोजगार और उद्योग—पर ही यह तय होगा कि यह डील भारत के लिए कितनी फायदेमंद साबित होती है। फिलहाल, व्यापार समझौता आर्थिक के साथ-साथ राजनीतिक बहस का भी बड़ा मुद्दा बन गया है।
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